PM मोदी का बड़ा एलान, प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेगा न्यूक्लियर सेक्टर; बताया 2047 का टारगेट

PM मोदी का बड़ा एलान, प्राइवेट कंपनियों के लिए खुलेगा न्यूक्लियर सेक्टर; बताया 2047 का टारगेट

Private Companies In Atomic Sector

Private Companies In Atomic Sector

नई दिल्ली : Private Companies In Atomic Sector: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने को लेकर बड़ी घोषणा की है. गुरुवार को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है. वह इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन कर रहे थे.

कार्यक्रम को वीडियो के जरिए संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह से अंतरिक्ष क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोला गया है, उसी तरह से परमाणु क्षेत्र को भी निजी कंपनियों के लिए खोलने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर में कई निजी कंपनियों ने इनोवेशन को अपनाकर बड़ा कमाल दिखाया है और पूरा विश्व उसका लोहा भी मान रहा है.

पीएम ने कहा कि निजी क्षेत्र ने ही आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्काईरूट जैसी कंपनियों को जन्म दिया है. पीएम मोदी इसी कंपनी के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस कंपनी को पवन चंदना और भारत ढाका ने स्थापित की है. दोनों ही आईआईटी के छात्र रह चुके हैं. वे दोनों इसरो के साइंटिस्ट रह चुके हैं. स्काईरूट ने ही 2022 में विक्रम एस को प्रक्षेपित किया था. पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह से भारत एटॉमिक सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने पर विचार कर रहा है.

इस समय देश में जितने भी न्यूक्लियर पावर प्लांट हैं, वे सरकारी कंपनी के नियंत्रण में हैं. मुख्य जवाबदेही एनपीसीएल की है. अगर सरकार नए नियम लागू करती है, तो निजी कंपनियों को भी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन के लिए बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. इसके लिए सरकार बहुत संभव है कि संसद के शीत कालीन सत्र में ही परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 ला सकती है.

आपको बता दें कि अमेरिका के पास न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन की सबसे बड़ी शक्ति है. वह इसका सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है. पूरी दुनिया में जितना भी परमाणु ऊर्जा का उत्पादन होता है, उसका अकेले 30 फीसदी हिस्सा अमेरिका उत्पादन करता है. और वहां पर जितना भी उत्पादन होता है, उसकी 80 फीसदी क्षमता निजी क्षेत्रों के पास है.

अमेरिका के बाद दूसरा स्थान चीन का आता है. वैश्विक स्तर पर इसकी भागीदारी 16 फीसदी के आसपास है. हालांकि, चीन में निजी कंपनियों की भागीदारी नहीं है. परमाणु पावर प्रोडक्शन में फ्रांस की वैश्विक हिस्सेदारी 14 फीसदी के आसपास है. यहां पर भी सरकारी कंपनी ईडीएफ का ही बोलवाला है. इसी तरह से रूस चौथा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है, यहां पर भी जवाबदेही सरकारी कंपनी रोस्टोएम की है. इसकी हिस्सेदारी आठ फीसदी तक है. इसके बाद द. कोरिया का स्थान आता है. यहां पर भी केएचएनपी सरकारी कंपनी है, जो इसका काम देखती है.

पीएम मोदी ने कहा कि स्पेस सेक्टर में भारत ने कमाल दिखाया है. हमारी निजी कंपनियां बेजोड़ काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि अब तो वैश्विक कंपनियां भारत में उपग्रहों का निर्माण करना चाहती हैं, प्रक्षेपण सेवाएं प्राप्त करना चाहती हैं तथा प्रौद्योगिकी साझेदारी चाहती हैं. उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में फिनटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक, क्लाइमेटटेक, एडुटेक और डिफेंसटेक जैसे विविध क्षेत्रों में स्टार्टअप की एक नयी लहर उभरी है, जिसमें भारत के युवा, विशेष रूप से ‘जेन जेड’ पीढ़ी, हर क्षेत्र में अभिनव समाधान प्रदान कर रहे हैं.