शिमला ग्रीष्मोत्सव में गूंजी पहाड़ी कविता, कवि सम्मेलन में सजी हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत
- By Gaurav --
- Tuesday, 09 Jun, 2026
Pahari Poetry Takes Centre
अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के दूसरे दिन ऐतिहासिक Gaiety Theatre में आयोजित भव्य पहाड़ी कवि सम्मेलन ने हिमाचल की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया तथा अपनी रचनाओं के माध्यम से लोक संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक सरोकारों और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिमला के उपायुक्त Anupam Kashyap उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को संरक्षित एवं संवर्धित करना है। उन्होंने पहाड़ी भाषा और साहित्य को प्रदेश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
उपायुक्त ने घोषणा की कि कवि सम्मेलन में प्रस्तुत की गई पहाड़ी कविताओं का संकलन तैयार कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। यह पुस्तक प्रदेश के विभिन्न पुस्तकालयों में उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि अधिक से अधिक लोग पहाड़ी साहित्य और इसकी समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें।
उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्यकार सामाजिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार संस्कृति के संरक्षण और समाज के निर्माण में साहित्यकारों का योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहेगा।
कवि सम्मेलन के दौरान कवियों ने लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और मानवीय संवेदनाओं जैसे विषयों पर आधारित अपनी स्वरचित पहाड़ी कविताओं का पाठ किया। श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 का एक प्रमुख आकर्षण रहा, जिसने न केवल पहाड़ी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहन दिया बल्कि युवा रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच भी प्रदान किया।