ईरान के नए 'सुप्रीम लीडर' का हुआ ऐलान; खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को कमान, जानें कितना शक्तिशाली है ईरान का ये पद?
Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader After Ayatollah Ali Khamenei Killed
Iran New Supreme Leader: बीते 1 मार्च को 'अमेरिका-इजरायल' के भीषण हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के 'उत्तराधिकारी' का ऐलान कर दिया गया है। यानि ईरान ने अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। अली खामेनेई के 56 साल के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। ईरानी एक्सपर्ट्स असंबेली ने आधिकारिक तौर पर मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया। वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर के तौर पर मोजतबा खामेनेई के नाम की जानकारी ईरानी सरकारी टीवी द्वारा सार्वजनिक की गई।
वहीं इसी के साथ सुप्रीम लीडर के चयन के बाद खामेनई के सोशल मीडिया हैंडल से भी एक पोस्ट किया गया। जिसमें लिखा गया, “लीडरशिप पर एक्सपर्ट्स की असेंबली ने अपने धार्मिक कर्तव्य और भगवान के सामने हाज़िरी में विश्वास के अनुसार, आज के खास सेशन में लीडरशिप पर एक्सपर्ट्स की असेंबली के सम्मानित प्रतिनिधियों के एकमत वोट के आधार पर, अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा हुसैनी रावमेही (भगवान उनकी रक्षा करें) को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के पवित्र सिस्टम के तीसरे लीडर के तौर पर नियुक्त और पेश किया गया है।”
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मोजतबा खामेनेई सुप्रीम पद के सबसे मजबूत दावेदार थे
अली खामेनेई की हत्या के बाद मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। इस पद के लिए उनकी गिनती लंबे समय से प्रमुख दावेदारों में होती रही है। 56 साल के मोजतबा अपने पिता की तरह एक कट्टरपंथी धर्मगुरु हैं। मोजतब उन लोगों में से एक हैं जो अपने पिता अली खामेनेई के सलाहकार के तौर पर काम करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने कभी कोई निर्वाचित या औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला है। वहीं मोजतबा, ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के भी करीबी बताए जाते हैं। मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद ईरान में लोगों ने जश्न मनाया है। हालांकि कई लोगों ने विरोध भी जताया।

ईरान के 'सुप्रीम लीडर' का पद कितना शक्तिशाली?
अब जब खामेनेई के 56 साल के बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान तीसरे सुप्रीम लीडर का पद संभाल रहे हैं तो आइये जानते हैं की ये पद ईरान में कितना शक्तिशाली है। बता दें कि ईरान में सुप्रीम लीडर एक ऐसा पद है जो ईरान के सभी मामलों में आखिरी फैसला लेने का अधिकार रखता है। किसी भी फैसले को पलट सकता है, कोई भी आदेश दे सकता है। जिससे मानना ही होगा। मतलब ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश के राष्ट्रपति से भी ज्यादा शक्तिशाली पद है। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मारे जाने को लेकर ट्रंप ने कहा था कि वो बहुर क्रूर और दुनिया के लिए खतरनाक था इसलिए मार दिया।
ट्रंप ने कहा था- सुप्रीम लीडर के लिए मेरी मंजूरी जरूरी
ईरान की सत्ता में यह बड़ा बदलाव और मोजतबा के सुप्रीम लीडर बनने पर यह माना जा रहा है कि ईरान का यह फैसला अमेरिका से टकराव और बढ़ाएगा। माना जा रहा है कि इसके बाद मिडिल ईस्ट में जारी जंग और तेज हो सकती है। दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ये कह चुके हैं की उनकी मौजूदगी या मंजूरी के बिना ईरान के नए सुप्रीम लीडर को नहीं चुना जा सकता। हाल ही में ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा था, 'यदि मारे गए अयातुल्लाह अली खामेनेई की जगह नया सुप्रीम लीडर चुना गया और उसे उनकी मंजूरी नहीं मिली, तो वह नेता “ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा।' ,ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए खुली चेतावनी और दबाव की रणनीति के रूप में देखा गया।
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अली खामेनेई के बारे में
अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक साधारण मौलवी से सुप्रीम लीडर बनने तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही खामेनेई शिया मुस्लिम वर्ल्ड के सबसे बड़े नेता बने. खामेनेई ने 36 सालों तक ईरान की सत्ता संभाली। ईरान का सुप्रीम लीडर बनने से पहले वो देश के राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री के पद पर भी रहे थे। एक आम मौलवी से सुप्रीम लीडर बनने तक का सफर खामेनेई के लिए आसान नहीं था। ईरान में महिलाओं पर पाबंदियों को लेकर खामेनेई का उनके ही देश में विरोध भी हुआ। महिलाओं ने खामेनेई को क्रूर शासक बताते हुए उनकी तस्वीरों को सिगरेट से आग लगाई और खामेनेई शासन को देश से उखाड़ फेंकने की बात कही थी।
जंग में अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत
28 फरवरी से शुरू हुए ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' युद्ध में अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। वहीं इस जंग में अमेरिका के 6 सैनिक भी शहीद हुए हैं। बता दें कि जंग में जहां अमेरिका और इजरायल एकसाथ मिलकर ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं तो वहीं ईरान भी पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई करते देखा जा रहा है। ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया है और वहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ वहां की सार्वजनिक-रेजिडेंसियल इमारतों पर भी मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। जिससे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है।