उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए बड़ी पहल: पीएम-श्रम योगी मानधन योजना से बढ़ी सामाजिक सुरक्षा
Major Initiative for Workers in Uttar Pradesh
लखनऊ। Major Initiative for Workers in Uttar Pradesh, उत्तर प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना' (PM-SYM) नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रदेश में श्रमिकों को बुढ़ापे में पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाए गए विशेष अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 15 जनवरी से 15 मार्च 2026 तक चले इस सघन अभियान ने न केवल नामांकन की गति को तेज किया है, बल्कि कई जिलों ने लक्ष्य से आगे बढ़कर इस योजना को जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।
विशेष अभियान: फिरोजाबाद और गाजियाबाद का जलवा
हाल ही में संपन्न हुए विशेष दो-दिवसीय अभियान के दौरान जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। नामांकन के मामले में फिरोजाबाद 349 नए पंजीकरणों के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान पर रहा। इसके ठीक पीछे गाजियाबाद (262) और बस्ती (238) ने अपना दबदबा बनाए रखा। इस सफलता में बांदा, बरेली, अंबेडकर नगर, हापुड़ और बिजनौर जैसे जिलों की सक्रिय भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई, जिससे जमीनी स्तर पर श्रमिकों को सीधे योजना से जोड़ा जा सका।
सालाना प्रगति: हरदोई और आजमगढ़ बने मॉडल जिले
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अब तक के कुल प्रदर्शन पर नजर डालें, तो हरदोई जिला 929 नामांकनों के साथ प्रदेश का सबसे सफल जिला बनकर उभरा है। आजमगढ़ (597) और गाजियाबाद (547) ने भी निरंतर बेहतर प्रदर्शन करते हुए खुद को मॉडल जिलों के रूप में स्थापित किया है। इसके अलावा प्रतापगढ़, बस्ती, बलिया, मेरठ और वाराणसी जैसे प्रमुख केंद्रों में भी योजना के प्रति श्रमिकों का भरोसा बढ़ता देखा गया है, जो प्रदेश सरकार की सफल रणनीति का परिणाम है।
सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार
योगी सरकार द्वारा संचालित इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि उन जिलों में भी सुधार की प्रक्रिया तेज हुई है, जो पहले पीछे थे। प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे विशेष प्रयासों और घर-घर जाकर दी जा रही जानकारी से अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अपने भविष्य के प्रति निश्चिंत हो रहे हैं। प्रदेश सरकार की सतत मॉनिटरिंग और जिला प्रशासन की तत्परता से यह योजना उत्तर प्रदेश के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को एक नई और मजबूत पहचान दे रही है।