मेजर दलपत सिंह: इजराइल की आज़ादी का राजपूती नायक, जिनकी तलवार ने बदल दिया दुनिया का भूगोल

मेजर दलपत सिंह: इजराइल की आज़ादी का राजपूती नायक, जिनकी तलवार ने बदल दिया दुनिया का भूगोल

Major Dalpat Singh: The Rajput hero of Israel independence

Major Dalpat Singh: The Rajput hero of Israel's independence,

जयपुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अजमेर की धरती से जिस मेजर दलपत सिंह को नमन किया, उनकी कहानी किसी हॉलीवुड फिल्म से भी ज्यादा रोमांचक और गौरवशाली है। यह कहानी है उस 'रॉयल ऑफिसर' की, जिसने आधुनिक बंदूकों का जवाब सिर्फ 'भाले और शौर्य' से दिया।

इतिहास गवाह है, जब-जब दुनिया ने तलवारों को कमतर आंका, राजस्थान के बेटों ने तोपों के मुंह मोड़ दिए।
 

जब मशीनगनों के सामने 'सफेद घोड़ा' दौड़ा

23 सितंबर 1918 का वो मंजर आज भी इजराइल की रगों में दौड़ता है। इजराइल का 'हाइफा' शहर तुर्की और जर्मनी की आधुनिक सेना के कब्जे में था। उनके पास पहाड़ों पर तैनात मशीनगनें और तोपें थीं। ब्रिटिश जनरल ने इसे 'नामुमकिन' मिशन करार दिया था। तभी मैदान में उतरे मेजर दलपत सिंह। उन्होंने अपने योद्धाओं से कहा कि 'हथियार छोटे हैं, पर हौसला बड़ा है।'

 

इंग्लिश जेंटलमैन के भेष में 'राजपूती शेर'

पाली के देवली गांव में जन्मे दलपत सिंह कोई साधारण सैनिक नहीं थे। वे एक 'एलीट' प्रोफाइल के मालिक थे। उनके पिता कर्नल हरि सिंह पोलो के जादुई खिलाड़ी और सेना के दिग्गज थे। दलपत सिंह ने इंग्लैंड के ईस्टबर्न कॉलेज में पढ़ाई की। वे जितने माहिर अपनी मातृभाषा में थे, उतनी ही फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे। महज 18 साल की उम्र में वे सेना के उस दस्ते का हिस्सा बने, जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक कैवलरी माना जाता था।

 

इजराइल आज भी करता है 'सजदा'

दुनिया ने उन्हें 'हाइफा हीरो' का खिताब दिया। इजराइल ने अपने कर्ज को कभी नहीं भुलाया। वहां के स्कूलों में बच्चों को मेजर दलपत सिंह की बहादुरी पढ़ाई जाती है। पीएम मोदी ने साल 2018 में दिल्ली के प्रतिष्ठित 'त्रिमूर्ति चौक' का नाम बदलकर 'त्रिमूर्ति हाइफा चौक' कर दिया, ताकि देश अपने इस लाल को कभी न भूले। राजस्थान के इस वीर योद्धा ने इजराइल की आजादी की नींव रखी थी। मेजर दलपत सिंह का बलिदान आज भी भारत और इजराइल की दोस्ती का सबसे मजबूत स्तंभ है।