योगी सरकार का नया फ़ैसला, खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव
Major Changes in Food Licensing and Registration Regulations
-
वार्षिक खाद्य लाइसेंस नवीनीकरण अब अनिवार्य नहीं।
-
स्ट्रीट वेंडर्स स्वतः FSSAI में पंजीकृत माने जाएंगे।
-
पंजीकरण और लाइसेंस के लिए टर्नओवर सीमा बढ़ी।
लखनऊ। Major Changes in Food Licensing and Registration Regulations, खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया गया है। अब हर साल लाइसेंस का नवीनीकरण कराना जरूरी नहीं होगा। इसके साथ ही नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत ठेले-खोमचे और फेरीवाले अब अपने-आप भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में पंजीकृत माने जाएंगे। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह व्यवस्था खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और पंजीकरण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत लागू की गई है। गजट में प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी हो गए हैं। एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। हालांकि सभी खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना होगा।
इसके तहत छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टाल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी इस व्यवस्था में शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा। यदि कोई कारोबारी वार्षिक शुल्क या फूड सेफ्टी अनुपालन से जुड़ा रिटर्न जमा नहीं करता है तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित माना जाएगा।
खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण अब जोखिम आधारित प्रणाली के तहत किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर थर्ड पार्टी से फूड सेफ्टी आडिट भी कराया जा सकेगा।
व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के अनुसार पहले व्यापारी एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस लेते थे और समय पर नवीनीकरण न कराने पर लाइसेंस निरस्त हो जाता था।
इसके बाद उन्हें दोबारा जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। नियमों में टर्नओवर की सीमा भी बढ़ाई गई है।
पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को पंजीकरण मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी तरह पहले पांच करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था और उससे अधिक टर्नओवर पर केंद्र से लाइसेंस लेना पड़ता था।
अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल नवीनीकरण कराना होगा। इसके बाद नए नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे।