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Editorial: वायु प्रदूषण रोकने को सभी उपायों पर काम होना जरूरी

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र जिसमें हरियाणा के 14 जिले शामिल होते हैं, के अंदर वायु प्रदूषण रोकने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप को लगाया जाना निश्चित रूप से कारोबारियों और व्यवसायियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह समय की मांग है और इसका संकेत भी कि भविष्य में ऐसे उपाय और सख्ती से लागू किए जाएंगे अगर हम आज सचेत नहीं हुए तो। ग्रैप के लागू होने के बाद इन जिलों में जनरेटर चलाने पर प्रतिबंध लग गया है, हालांकि आवश्यकता होने पर अस्पताल, मेडिकल उपकरण चलाने वाले संस्थान, सेना से संबंधित कार्यों और इमरजेंसी की स्थिति में जनरेटर का प्रयोग किया जा सकेगा। जिन स्थानों पर पीएनजी की लाइन नहीं बिछ पाई है, उन जगहों को भी इससे निजात दी गई है, वहां यह सिस्टम 2024 से लागू होगा।

वास्तव में यह समझना जरूरी है कि आखिर ग्रैप को लागू करने की जरूरत क्यों आई है। दरअसल, सर्दी के मौसम में दिल्ली का वातावरण धुएं से भर जाता है और इसकी वजह बनता है एनसीआर में हो रहा प्रदूषण। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के किसानों के द्वारा पराली जलाने से भी प्रदूषण फैलता है। बावजूद इसके दिल्ली में वाहनों की भारी तादाद भी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान देती है। ऐसे में प्रदूषण की वजह से हवा की गुणवत्ता में और गिरावट रोकने के लिए यह उपाय अमल में लाया जा रहा है।

यह तय है कि अगर हरियाणा के 14 जिलों में जनरेटर चलाने की इजाजत नहीं होगी तो यहां बिजली पर ही पूरा दारोमदार टिका होगा। प्रदेश में पहले की तुलना में बिजली सप्लाई के हालात सुधरे हुए हैं। अब प्रदेश में बिजली का वह संकट नजर नहीं आता जोकि एक समय होता था। यह राज्य सरकार की ओर से उठाए गए प्रभावी कदमों की वजह से संभव हुआ है। हालांकि ग्रैप सिस्टम लागू होने के बाद अब व्यापारियों, कारोबारियों के सामने बिजली की किल्लत न आए, इसके प्रयास सरकार को करने होंगे। वैसे सरकार ने इसके लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। बिजली मंत्री का दावा है कि पहले से ही एनसीआर के प्रमुख शहरों में 24 घंटे बिजली सप्लाई दी जा रही है। अब ग्रैप सिस्टम लागू होने के बाद यह अच्छी तरह से सुनिश्चित किया जाएगा कि उद्यमियों को किसी तरह की बिजली संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।

वास्तव में यह राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि इस सिस्टम को सफल होने में योगदान दे। बेशक, यह कार्य मुश्किल भी है, क्योंकि व्यापारियों, उद्यमियों ने जनरेटर चलाने में छूट की मांग की थी। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि सरकार को यह समझना चाहिए कि केवल मात्र जनरेटर चलाने से ही प्रदूषण नहीं होता अपितु दूसरे जरियों से भी हवा में जहर फैल रहा है। तो उसका क्या?

दरअसल, यह जरूरी है कि उन सभी जरियों के संबंध में विचार किया जाए जोकि वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं। यह समय हरियाणा, पंजाब में धान की फसल की कटाई का है, फसल कट कर मंडियों में पहुंच चुकी है और खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जा रहा है। किसान धान के अवशेष पराली को निकालने के बाद उसे जलाने में लगे हैं। हरियाणा सरकार की ओर से इस संबंध में उच्च स्तरीय स्तर पर निगरानी तंत्र गठित किया गया है। खुद मुख्य सचिव ने इस संबंध में बैठक की है और उन लोगों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं जोकि पराली जला रहे हैं।

हालांकि देखने में आया है कि राजनीतिक ऐसे लोगों को संरक्षण दे रहे हैं जोकि पराली जलाने का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए पंजाब एवं हरियाणा में वाद-विवाद प्रतियोगिता भी होती है, जिसमें दोनों राज्यों की सरकारें एक-दूसरे के यहां पराली जलने की शिकायत करती हैं। लेकिन यह मामला किसी भी तरह से राज्यों तक सीमित नहीं है, यह राष्ट्रीय विषय है। हरियाणा तो वह प्रदेश है, जहां मनोहर सरकार ने धान की फसल रोपने से किसानों को रोकने के लिए स्कीम शुरू की हैं। यानी धान की फसल के लिए पानी की बर्बादी और फिर पराली जलाने की समस्या का भी समाधान सरकार ने सोचा है। ऐसे में यह आवश्यक है कि सभी राज्य सरकारें ऐसे उपायों पर काम करें। वहीं दिल्ली में भी इसके लिए उपयुक्त उपाय किए जाने चाहिएं। ऑड-इवन सिस्टम दिल्ली में लागू किया जाता है, इसका थोड़ा असर पड़ता है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि अब सब कुछ बड़े पैमाने पर करने की जरूरत है।

 ग्रैप सिस्टम कितना सफल होगा इसका पता भविष्य में लगेगा। लेकिन यह तय है कि जब तक प्रदूषण की रोकथाम के तमाम उपायों पर काम नहीं होगा, इसे रोकना मुश्किल है। इसके अलावा हवा में प्रदूषण रोकने की कवायद फाइलों से बाहर आकर जन अभियान बननी चाहिए। पर्यावरण संरक्षण केवल मात्र सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, यह हर नागरिक की भी जरूरत है। 

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