ईरान-अमेरिका के बीच 45 दिन का 'युद्धविराम' हो सकता; सीजफायर समझौते पर बातचीत चल रही, इधर ट्रंप ने अल्टीमेटम भी दे रखा
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Iran-US War Update: एक महीने के ज्यादा समय से जारी अमेरिका और ईरान की जंग ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है। ऐसे में इस जंग को रोकने की हर कोशिश की जा रही है। इस बीच एक उम्मीद भरी खबर आई है कि ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन का 'युद्धविराम' हो सकता है। अमेरिका, ईरान के बीच 45 दिन के संभावित सीजफायर पर चर्चा की जा रही है और इस शांति वार्ता में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के मध्यस्थ सीज़फ़ायर की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि 'खतरनाक तनाव बढ़ने' से बचने का यह एकमात्र मौका हो सकता है और युद्धविराम की यह आखिरी कोशिश हो सकती है। अगर 45 दिन जंग रोकने पर सहमति बन जाती है, तो फिर इसके अगले चरण में स्थायी शांति समझौते पर बात होगी। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में 45 दिन का सीजफायर लागू किया जाएगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत की जाएगी।
यानि अगर यह समझौता हो जाता है तो यह 2 चरणों में होगा। पहला चरण 45 दिन का सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध के स्थायी अंत के लिए मध्यस्थता की जाएगी। दूसरे चरण में, आदर्श रूप से, युद्ध को समाप्त करने का एक समझौता शामिल होगा। जिससे युद्ध का स्थायी अंत हो सकता है। जिससे दुनिया को भी राहत मिल सकती है।
इधर ट्रंप ने अल्टीमेटम भी दे रखा
वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर सीजफायर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर बड़े हमले किए जा सकते हैं, जिसकी तैयारी अमेरिका और इजरायल ने कर ली है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि क्योंकि ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम दे रखा है। राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से दी गई समयसीमा खत्म होने का वक्त जैसे-जैसे करीब आ रहा है, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले तेज कर दिए है।
दरअसल हाल ही में एक बयान जारी करते हुए ट्रंप ने कहा था कि ईरान को मिला समय खत्म हो रहा है, वह डील करे और होर्मुज स्ट्रेट खोले अन्यथा उसका अंजाम बुरा होगा और नरक में जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और इस अल्टीमेटम को अमेरिका का बेबस, घबराया हुआ, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण बयान बताया था।
जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों की मौत
28 फरवरी से जारी ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 7000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं।
इधर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने पर अमेरिका जो सोच रहा था वैसा हुआ नहीं। ईरान को कमतर आंकना अमेरिका की चूक रही। अब हालत यह है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा रहा है तो ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका भी काफी कुछ खो रहा है। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक अब तक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 200 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.