Crude Oil from Iran: ईरान से कच्चे तेल के इंपोर्ट पर भारत सरकार का बयान; कहा- पेमेंट की समस्या नहीं, चीन भेजने की खबरें गलत

ईरान से कच्चे तेल के इंपोर्ट पर भारत सरकार का बयान; कहा- पेमेंट की समस्या नहीं, क्रूड कार्गो को इंडिया से चीन भेजने की खबरें गलत

Indian Government statement over Crude Oil from Iran false news   breaking

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Crude Oil from Iran: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग से ऊर्जा क्षेत्र काफी हद तक प्रभावित है। इस बीच भारत ने यह कन्फर्म किया है कि वह ईरान से एनर्जी ले रहा है। दरअसल भारत सरकार ने ईरान से कच्चे तेल के इंपोर्ट पर एक बयान जारी किया है। यह बयान उस संबंध में है, जिसमें ईरानी कच्चे तेल के इंपोर्ट को लेकर भारत के सापेक्ष में कुछ गलत खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट फैलाई जा रहीं हैं। ऐसी सभी खबरों और पोस्टों का अब भारत सरकार ने खंडन किया है।

भारत सरकार के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने आधिकारिक तौर से बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान के कच्चे तेल के कार्गो को 'पेमेंट की समस्या' की वजह से भारत के वाडिनार से चीन भेजने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट पूरी तरह से गलत हैं। मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावटों के बीच, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से कच्चे तेल के इंपोर्ट सहित बाकी जगहों से अपनी ज़रूरतें पूरी कर ली हैं और ईरान से कच्चे तेल के इंपोर्ट के लिए पेमेंट में कोई रुकावट नहीं है। कुछ अफवाहों में जैसा कहा जा रहा है। भारत सरकार ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की ज़रूरतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

दरअसल पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए लिखा, "ईरान के क्रूड कार्गो को 'पेमेंट की दिक्कत' की वजह से भारत के वडिनार से चीन भेजने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट असल में गलत हैं। भारत 40+ देशों से क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है, और तेल कंपनियों को कमर्शियल वजहों से अलग-अलग सोर्स और जगहों से तेल लेने की पूरी छूट है।''

बयान में आगे कहा गया, ''मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावटों के बीच, भारतीय रिफाइनर ने ईरान और बाकी जगहों से अपनी क्रूड ऑयल की ज़रूरतें पूरी कर ली हैं; और ईरानी क्रूड इंपोर्ट के लिए पेमेंट में कोई रुकावट नहीं है, जो फैलाई जा रही अफवाहों के उलट है। जहाज़ के डायवर्जन के दावों में इस बात को नज़रअंदाज़ किया जाता है कि तेल का व्यापार कैसे काम करता है। बिल ऑफ़ लैडिंग में अक्सर इंडिकेटिव डिस्चार्ज पोर्ट डेस्टिनेशन होते हैं और ऑन-सी कार्गो ट्रेड ऑप्टिमाइज़ेशन और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के आधार पर बीच यात्रा में डेस्टिनेशन बदल सकते हैं।''

मंत्रालय ने कहा, ''यह दोहराया जाता है कि आने वाले महीनों के लिए भारत की क्रूड ऑयल की ज़रूरतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं।'' वहीं सरकार ने LPG को लेकर भी बयान जारी करते हुए कहा है कि LPG पर भी कुछ ऐसे दावे किया जा रहे हैं जो गलत हैं। सरकार ने जानकारी दी कि 44 TMT ईरानी LPG टैंकर 2 अप्रैल को भारत के मैंगलोर में बर्थ किया गया था और अभी डिस्चार्ज हो रहा है।"

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जंग थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे

फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 'ईरान और अमेरिका-इजरायल' जंग के अभी इतनी जल्दी थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। एक तरफ जहां ईरान को झुकाने के लिए 'अमेरिका-इजरायल' की तरफ से हमले तेज हो रखे हैं तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाने के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके साथ ही वह अन्य ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहा है।

माना जा रहा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी इसलिए कर रहा है ताकि दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़े और अमेरिका-इजराइल अपने हमले रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। बता दें कि जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गैस आपूर्ती भी प्रभावित हो रही है। कुलमिलाकर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा रहा है। जिससे भारत भी अछूता नहीं है। भारत में भी तेल-गैस आपूर्ती को मिडिल ईस्ट जंग ने प्रभावित किया है।

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जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों की मौत

28 फरवरी से जारी ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 7000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं।

इधर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने पर अमेरिका जो सोच रहा था वैसा हुआ नहीं। ईरान को कमतर आंकना अमेरिका की चूक रही। अब हालत यह है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा रहा है तो ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका भी काफी कुछ खो रहा है। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक अब तक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 200 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.