पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, सिर्फ यात्रा दस्तावेज है: विदेश मंत्रालय ने दी सफाई
Passport is not proof of citizenship
नई दिल्ली: Passport is not proof of citizenship, पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है. पिछले दिनों इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी. इसी को लेकर बहस तेज है और अब विदेश मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में बताया है कि पासपोर्ट का उद्देश्य सिर्फ भारत से दूसरे देशों में जाने वाले लोगों के रेगुलेशन का एक दस्तावेज है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बाद ही जारी किए जाते हैं. फिलहाल 8 फीसदी भारतीयों के पास ही पासपोर्ट है. 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों ने कहा था कि यह एक ट्रैवल डॉक्युमेंट है. यह नागरिकता साबित करने का प्रमाण पत्र नहीं है.
मंत्रालय के अधिकारियों का यह बयान उस सवाल के जवाब में आया था, जिसमें पूछा गया था कि क्या SIR की प्रक्रिया के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट दिखाया जा सकता है. इस पर अधिकारियों ने कहा था कि ऐसा नहीं हो सकता. पासपोर्ट नागरिकता साबित करने का प्रमाण नहीं है बल्कि यह ट्रैवल डॉक्युमेंट ही है. इसके माध्यम से दूसरे देशों की यात्रा ही की जा सकती है. विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण को लेकर काफी चर्चा हुई थी. कई लोगों ने सवाल उठाया था कि जब पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर किस दस्तावेज को माना जाए. यह भी बताया जाना चाहिए.
इससे पहले आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड को लेकर भी ऐसा ही कहा जा चुका है. इसीलिए इसकी चर्चा हुई कि आखिर अब पासपोर्ट भी नागरिकता साबित करने का दस्तावेज नहीं है तो फिर किसे माना जाए. इस पर राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी थी. बता दें कि भारत में नागरिकता को साबित करने वाला कोई एक दस्तावेज नहीं है.
रणधीर जायसवाल ने कहा, 'पासपोर्ट ऐक्ट 1967 के तहत भारतीय पासपोर्ट जारी किया जाता है. इसका उद्देश्य भारत से बाहर जाने वाले यात्रियों का रेगुलेशन करना है.' प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे सवाल किया गया था. उन्होंने कहा कि पासपोर्ट ऐक्ट, 1967 और पासपोर्ट रूल्स 1980 के तहत यह जारी किया जाता है. इसका उद्देश्य इतना ही है कि भारत से बाहर दूसरे मुल्कों की यात्रा करने वाले लोगों का नियमन हो सके.