जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट ने दिए अहम निर्देश, बिल्डरों पर सीधे कार्रवाई का रास्ता
High Court issues key directives regarding
जमशेदपुर। High Court issues key directives regarding, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में बिना कंप्लीशन और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के खड़ी इमारतों के मामले में मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अवैध निर्माण करने वाले मुख्य बिल्डरों को सीधे प्रतिवादी (पार्टी) बनाते हुए नई याचिका दायर करें। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इसके साथ ही मौजूदा जनहित याचिका को वापस लेने की छूट दे दी।
अदालत में आज क्या हुआ
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता अरुण कुमार सिंह के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल की दलीलें सुनीं। याचिका में शहर की हजारों अवैध इमारतों का जिक्र था। इस पर जजों ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए मौखिक टिप्पणी की कि हजारों लोगों को एक साथ पार्टी बनाने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने सुझाव दिया कि एक साथ 5000 को शामिल करने के बजाय 10-10 मुख्य बिल्डरों को पार्टी बनाएं। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब नई याचिका में उन सभी अवैध इमारतों का पूरा विवरण देना होगा, जो बिना सर्टिफिकेट के बनी हैं या जिनमें लोगों ने अवैध रूप से कब्जा लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
यह पीआईएल सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के उस अहम फैसले के अनुपालन न होने पर दायर की गई थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश था कि नक्शा पास करने से पहले बिल्डर से शपथ-पत्र लिया जाए कि वह बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के फ्लैट किसी को नहीं बेचेगा। आरोप है कि झारखंड के मुख्य सचिव और जेएनएसी ने इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
जेएनएसी की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में है। पिछले 20 सालों में शहर में करीब 2000 इमारतों के नक्शे पास हुए, लेकिन कंप्लीशन सर्टिफिकेट महज 28 भवनों को जारी किए गए। 15 साल में 650 बिल्डरों को दिखावे के लिए नोटिस भेजा गया, लेकिन कार्रवाई शून्य रही।
आरोप है कि जेएनएसी अधिकारी और बिल्डर साठगांठ कर अवैध उगाही कर रहे हैं। अब हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद शहर के कई बिल्डरों पर सीधे कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है।