In Haryana, the cadre change policy for district cadre teachers is being

हरियाणा में जिला कैडर शिक्षकों की कैडर चेंज पॉलिसी पर फिर मंथन, महिला शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत

Cabinet Haryana

In Haryana, the cadre change policy for district cadre teachers is being

हरियाणा सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 दिसंबर 2025 को अधिसूचित डिस्ट्रिक्ट कैडर टीचर्स के लिए कैडर चेंज पॉलिसी–2025 एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। सरकार ने इस नीति को जिला कैडर शिक्षकों को स्वैच्छिक आधार पर जिला बदलने का अवसर देने के उद्देश्य से लागू किया था, ताकि शिक्षकों की व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं का समाधान किया जा सके और प्रदेश के स्कूलों में अध्यापकों का संतुलन बेहतर बनाया जा सके। हालांकि, पॉलिसी की कुछ सख्त शर्तों के कारण यह व्यवस्था ज़मीनी स्तर पर अपेक्षित राहत नहीं दे पा रही है।

पॉलिसी का उद्देश्य और दायरा

कैडर चेंज पॉलिसी–2025 को लागू करते समय सरकार का मकसद यह था कि वर्षों से एक ही जिले में तैनात शिक्षक अपनी परिस्थितियों के अनुसार दूसरे जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकें। यह पॉलिसी नियमित आधार पर कार्यरत PRT/JBT, हेड टीचर और C&V श्रेणी के शिक्षकों पर लागू होती है।

पॉलिसी के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाने के लिए मेरिट अंक प्रणाली अपनाई गई है। इसमें आयु के आधार पर अधिकतम 60 अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि सेवानिवृत्ति के निकट शिक्षक, गंभीर बीमारी से पीड़ित, अधिक दिव्यांगता वाले तथा विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाली शिक्षिकाओं को 80 अंक तक की विशेष प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है।

डीम्ड वैकेंसी का प्रावधान

पॉलिसी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल वास्तविक रिक्तियों को ही नहीं, बल्कि कैडर चेंज के लिए आवेदन करने वाले शिक्षक के पद को भी डीम्ड वैकेंसी माना गया है। इससे यह उम्मीद की गई थी कि एक जिले से दूसरे जिले में शिक्षकों का संतुलन स्वाभाविक रूप से बन जाएगा। लेकिन व्यवहार में यह प्रावधान भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो सका।

95 प्रतिशत की शर्त बनी सबसे बड़ी बाधा

इस पॉलिसी की सबसे विवादित और चर्चित शर्त वह है, जिसके अनुसार जिन जिलों में शिक्षकों की उपलब्धता रैशनलाइज्ड आवश्यकता के 95 प्रतिशत से कम है, वहां से किसी भी शिक्षक को बाहर ट्रांसफर की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यही शर्त अब सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव का मुख्य कारण बन गई है। यमुनानगर, पलवल, अंबाला और सिरसा जैसे जिलों में शिक्षकों की संख्या इस सीमा से कम होने के कारण वहां कार्यरत सैकड़ों शिक्षक, विशेषकर 2017 बैच की महिला अध्यापिकाएं, वर्षों से अपने गृह जिले या घर के नजदीक स्टेशन पर स्थानांतरण नहीं ले पा रही हैं।

महिला शिक्षकों को लेकर सरकार का बदला रुख

महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए अब सरकार ने इस पॉलिसी पर दोबारा मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, महिला शिक्षकों को घर के नजदीक स्टेशन देने के लिए 95 प्रतिशत की शर्त में आंशिक या पूर्ण संशोधन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर राहत दी जाती है तो इससे न केवल उनके कार्य-जीवन संतुलन में सुधार होगा, बल्कि शिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। प्रस्तावित बदलावों को जल्द ही दोबारा कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।

वरिष्ठता खोने के बावजूद तबादले को तैयार शिक्षक

वर्तमान नीति के तहत कैडर बदलने वाले शिक्षक को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाता है और पुराने जिले से उसका लियन भी समाप्त हो जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक, खासकर महिलाएं, केवल पारिवारिक कारणों से यह कीमत चुकाने को तैयार हैं।

शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक परिवार से दूर रहकर सेवा देने के बाद यदि उन्हें घर के नजदीक पोस्टिंग मिलती है, तो वरिष्ठता का नुकसान भी उन्हें स्वीकार है।

जेबीटी तबादलों का इतिहास और मौजूदा स्थिति

गौरतलब है कि जेबीटी शिक्षकों के सामान्य तबादले वर्ष 2016 में ही अंतिम बार हुए थे। इसके बाद से हर सरकार ने तबादलों को लेकर केवल आश्वासन ही दिए। हालांकि 2016 के बाद 2018, 2022 और 2023 में कुछ अंतर-जिला तबादले जरूर किए गए, लेकिन वे व्यापक स्तर पर नहीं थे।

वर्ष 2024 में 2017 बैच के शिक्षकों को स्थायी जिला आवंटन दिए जाने के बाद कई जिलों में अध्यापकों का संतुलन और अधिक बिगड़ गया। कुछ स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक तैनात हो गए, जबकि कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भारी कमी बनी हुई है।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों का यह असंतुलन सीधे तौर पर छात्रों की पढ़ाई और स्कूलों के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करता है। यदि कैडर चेंज और ट्रांसफर प्रक्रिया को नियमित, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाया जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

शिक्षकों की बढ़ती चिंता

वर्तमान में जनगणना सहित अन्य प्रशासनिक कारणों और ट्रांसफर प्रक्रिया में हो रही देरी के चलते शिक्षक समुदाय में चिंता बढ़ती जा रही है। शिक्षकों को आशंका है कि कहीं इस बार भी कैडर चेंज और तबादलों का मुद्दा केवल घोषणाओं और आश्वासनों तक ही सीमित न रह जाए।

अब प्रदेश के हजारों शिक्षक सरकार और कैबिनेट के अगले फैसले की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कैडर चेंज पॉलिसी–2025 वास्तव में शिक्षकों के लिए राहत बनेगी या फिर एक और अधूरी घोषणा साबित होगी।