बैंक बैलेंस नहीं, 'सुकून' के पीछे भागा यह भारतीय परिवार; अमेरिका की लक्जरी लाइफ को मारी लात!

लक्जरी लाइफ को मारी लात, क्योंकि 'दिल मांगे मोर'

बैंक बैलेंस नहीं, 'सुकून' के पीछे भागा यह भारतीय परिवार; अमेरिका की लक्जरी लाइफ को मारी लात!

News Desk: आजकल की इस ‘चूहा-दौड़’ वाली दुनिया में जहां लोग एक अदद प्रमोशन और सैलरी हाइक के लिए दिन-रात एक कर देते हैं, वहां एक शख्स ऐसा भी है जिसने करोड़ों का पैकेज, अमेरिका की मखमली लाइफ और आलीशान 4BHK बंगला... सब कुछ एक झटके में 'बाय-बाय' कह दिया।

सुनने में यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है एक IITian और उसके परिवार की। आइए जानते हैं आखिर इस 'पागलपन' के पीछे का माजरा क्या है! 

कल्पना कीजिए, आपके पास दुनिया की हर सुख-सुविधा हो। बैंक बैलेंस ऐसा कि सात पुश्तें बैठ कर खाएं, अमेरिका की सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां और रहने को महल जैसा घर। लेकिन इस IIT ग्रेजुएट के दिमाग में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। उन्हें लगा कि यह सब तो 'सोने का पिंजरा' है।

बस फिर क्या था? साहब ने इस्तीफा टाइप किया, अपना आलीशान बंगला बेचा और सामान पैक कर निकल पड़े अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दुनिया नापने।

क्यों 'भटक' रहा है यह परिवार?

इसे 'भटकना' कहना शायद गलत होगा, असल में यह परिवार 'खुद को खोज' रहा है।

  • मकसद: बच्चों को किताबों की दुनिया से बाहर निकालकर 'रियल वर्ल्ड' का एक्सपीरियंस देना।

  • नया ठिकाना: अब उनका घर कोई 4BHK बंगला नहीं, बल्कि हर रोज एक नया शहर और नई सड़कें हैं।

  • लाइफस्टाइल: करोड़ों की सैलरी छोड़कर अब यह परिवार एक वैन (Caravan) में रहता है और सादगी से जीवन बिता रहा है।


खानाबदोश जिंदगी और 'करोड़ों' का अनुभव

लोग कह रहे हैं कि बंदा सठिया गया है, लेकिन इस परिवार का मानना है कि असली दौलत बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि वो यादें हैं जो वे एक साथ बटोर रहे हैं।

  • कोई बॉस नहीं, कोई डेडलाइन नहीं: सुबह कहां जागना है और रात को कहां सोना है, इसका फैसला अब घड़ी नहीं, उनका मन करता है।

  • बच्चों की 'खुली' पाठशाला: उनके बच्चे अब भूगोल (Geography) किताबों में नहीं पढ़ते, बल्कि उसे अपनी आंखों से देख रहे हैं।


क्या आपमें है इतनी हिम्मत?

यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या हम वाकई जी रहे हैं या सिर्फ मशीन की तरह काम कर रहे हैं? इस IITian परिवार ने साबित कर दिया कि "जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।"

बेशक, उनके पास अब रहने को पक्का पता नहीं है, लेकिन उनके पास वो 'आजादी' है जिसे खरीदने की औकात दुनिया के बड़े से बड़े बैंक बैलेंस में भी नहीं है।