"अलीगढ़: IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे से प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल"
IAS Rinku Singh Rahi's Resignation Raises
अलीगढ़। सरकारी सेवा से इस्तीफा इस्तीफा देने वाले आईएएस रिंकू सिंह राही इन दिनों चर्चा में हैं। दरअसल, अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं दिया गया। ऐसा पहले बार नहीं हुआ है जब वह सुर्खियों में आए हों। आइए जानते हैं रिंकू सिंह राही की पूरी कहानी...
रिंकू सिंह राही अलीगढ़ के रहने वाले हैं। नौरंगाबाद क्षेत्र स्थित डोरी नगर में उनका घर है। रिंकू के पिता सौदान सिंह आटा-चक्की चलाते थे और इसी से परिवार का खर्चा चलता था। सौदान दिन ने बताया कि परिवार में एक बेटा और बेटी अभी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनके ताऊ के एक बेटे भारतीय इंजीनियरिंग सेवा में हैं और दूसरे पुलिस विभाग में जेलर के पद पर कार्यरत हैं।
2023 बैच के आईएएस अधिकारी हैं रिंकू सिंह
रिंकू सिंह यूपी काडर के वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी है। पिता सौदान सिंह का कहना है कि रिंकू सिंह ईमानदार है। मेहनती हैं। उसमें देश के लिए काम करने का जज्बा है। उन्होंने बड़े से बड़े प्रलोभन ठुकराए।
उन्होंने कहा, ''ईमानदारों का बैंक बेलेंस नहीं होता। इमान होता है। उन्हें काम क्यों नहीं दिया जा रहा। सरकार सही निर्णय ले। ईमानदारी का फल दे। ईमानदारी ठुकराई गई तो देश में ईमानदार नहीं होंगे।''
'ईमानदारी के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की'
सौदान सिंह ने बताया, वर्ष 2009 में रिंकू ने ईमानदारी के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की थी। मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी रहकर उन्होंने सौ करोड़ का घोटाला खोला। उन पर हमला हुआ। इसमें उनकी आंख की रोशनी प्रभावित हुई। कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। हमें गर्व है। वह जो निर्णय लेता है, देशहित में लेता है। योग्यता और ईमानदारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार से उचित निर्णय की उम्मीद जताते हुए रिंकू सिंह के ताऊ रघुवीर सिंह उसवा ने कहा कि अन्य आईएएस अधिकारियों की तरह रिंकू को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। काम नहीं दिया गया। नियुक्ति नहीं दी गई। यदि सम्मानजनक पद दिया जाता तो यह स्थिति नहीं आती।