Editorial

चेहरा बदलकर लौट आया कोरोना

Corona returned by changing face: कोरोना वायरस के खत्म होने की खुशी में जी रही दुनिया को फिर से सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि इस खतरनाक वायरस का नया वेरिएंट दस्तक दे चुका है। इसी महीने बोत्सवाना में मिला नया वेरिएंट ओमिक्रोन तेजी से फैल रहा है और इसे डेल्टा वेरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक बताया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने समय रहते दुनिया को इसके संबंध में सचेत करना शुरू कर दिया है, संगठन ने इसे तकनीकी शब्दावली में चिंता वाला वेरिएंट (वेरिएंट ऑफ कंसर्न/वीओसी) बताया है। उसने चेतावनी दी है कि यह काफी तेजी से और बड़ी तादाद में म्यूटेट होने वाला वेरिएंट है। पूरे विश्व में फिर से यात्रा प्रतिबंध लगने शुरू हो गए हैं और यूरोपीय देशों समेत अमेरिका ने अपने यहां यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। भारत में भी इसे लेकर चिंता व्याप्त हो गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई है। यह भी सामने आया है कि नए वेरिएंट के संबंध में पूरी जानकारी मिलने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं। भारत जैसे देश में जहां मुश्किल से कोरोना नियंत्रण में आया है, अब सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ फिर से केस बढऩे भारी चिंता की बात है। मालूम हो, देश में 15 दिसंबर से नियमित अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की गई है। अब स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों को खोल दिया गया है वहीं सिनेमा घर और अन्य सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी पूरे जोर-शोर से खुल चुके हैं। नए वेरिएंट के खतरे को रोकने के लिए अब देश को फिर से तैयार होना होगा, बीते वर्ष यही दिन थे, जब मामले स्थिर हो गए थे लेकिन लापरवाही बढ़ गई थी और मार्च, अप्रैल और मई-जून के महीनों में कोरोना ऐसा काल बनकर बरपा था, जिसने त्राहिमाम करवा दिया था। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत पूरे क्षेत्र में रोजाना कोरोना के नए मामले भी सामने आने लगे हैं। नए वेरिएंट के केस अभी भारत से दूर हैं, लेकिन कोरोना के पुराने केस ही अब फिर जिंदा होने लगे हैं। यह भी हैरत की बात है कि जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, वे भी पॉजिटिव मिल रहे हैं। खुद मेडिकल विशेषज्ञ यह बता रहे हैं कि जिन हेल्थ वर्कर्स या अन्य लोगों को छह महीने पहले वैक्सीन की दोनों डोज लगी हैं, उनमें से कुछ लोग पॉजिटिव आ रहे हैं। माना जा रहा है कि वैक्सीन लगवाने के बाद इम्यून सिस्टम फिर से कमजोर पड़ रहा है। बदलते म्यूटेंट की वजह से यह खतरा और बढ़ गया है, ऐसे में बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ सकती है। कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले लोगों में इम्यून सिस्टम के कमजोर होने की बात सामने आई है। वैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार की ओर से अभी तक इसके निर्देश नहीं हैं, लेकिन संभव है इसकी जरूरत पड़े। हालांकि को वैक्सीन की दोनों डोज लगने के बाद भी बूस्टर डोज की आवश्यकता है, इसे लेकर अनुसंधान चल रहा है। वैसे एक चिंता की बात यह भी है कि देश में वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद लाखों लोग दूसरी डोज लगवाने नहीं आए हैं। देश 100 करोड़ वैक्सीन लगाने का लक्ष्य हासिल कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद करीब 10 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई है। यह अपने आप में चिंताजनक बात है, क्योंकि दोनों डोज न लेने की सूरत में इम्यून सिस्टम पूरी तरह से निर्मित नहीं हो पाता और अब कोरोना के फिर बढ़ रहे मामलों की वजह से ऐसे लोगों पर खतरा बढ़ रहा है। चंडीगढ़ में इस समय 1.80 लाख लोगों को अभी तक दूसरी डोज नहीं लगी है, अब प्रशासन ने जहां एडवाइजरी जारी की है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने डोर टू डोर कैंपेन शुरू किया है, इसके तहत घरों में जाकर वैक्सीन लगाई जा रही है। लक्की ड्रॉ निकाल कर ऐसे लोगों को वैक्सीन लगवाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में देश का भविष्य यानी बच्चे, किशोर और युवाओं का काफी बचाव रहा। इस दौरान बुजुर्ग और मध्यम आयु वर्ग के लोगों पर कोरोना का कहर बरपा, लेकिन अब जब सब सामान्य होता दिख रहा है, तब शिक्षण संस्थानों को खोलने की जल्दी चिंताजनक है। जैसे-जैसे स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं, कोरोना के नए केस बढ़ते जा रहे हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सामने आ रहा है कि 10 बड़े राज्यों में पिछले 30 दिनों के अंदर 2400 विद्यार्थी कोरोना संक्रमित हुए हैं। जो महाराष्ट्र बीते वर्ष कोरोना के सर्वाधिक मामलों को झेल रहा था, अब जब सामान्य हो गया है तो यहां सबसे ज्यादा 1700 छात्र पॉजिटिव मिले हैं। चंडीगढ़ में इस समय 17 पॉजिटिव केस हैं, क्या प्रशासन इसका दावा कर सकता है कि यहां और केस नहीं आएंगे। ऐसे में क्या छोटी कक्षाओं को खोलने का निर्णय भी क्या सही कहा जाएगा। अब तो प्ले स्कूलों को भी खोल दिया गया है, किसी आपत्ति की स्थिति में न प्रशासन अभिभावकों के साथ खड़ा होगा और न ही स्कूल प्रशासन जोकि बच्चों को नियमित स्कूल आने को बाध्य कर रहा है, जबकि यही कार्य ऑनलाइन भी समुचित तरीके से जारी था। क्या जान से जहान नहीं है? जाहिर है, खतरा अभी टला नहीं है और कोरोना वायरस अभी भी हमारे बीच है। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग, मॉस्क, सेनेटाइजर आदि के साथ वैक्सीन लगवाना भी जरूरी है। यह मानवीय प्रकृति है कि जब तक उस पर दबाव नहीं पड़ता वह सचेत नहीं होता। सरकारों को इस दिशा में तेजी से कार्रवाई करनी होगी ताकि नये केस नियंत्रण में रहें।

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