हिमाचल पंचायत चुनाव: भाजपा के गढ़ करसोग में कांग्रेस का बड़ा उलटफेर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत

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Himachal Panchayat Elections: Congress pulls off a major

करसोग (मंडी)। Himachal Panchayat Elections: Congress pulls off a major, हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अभी जारी है। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले जिला मंडी में पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। करसोग पंचायत समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस बाजी मार गई। पंचायत समिति में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा समर्थित खेमा दोनों पदों पर कब्जा करने में असफल रहा, जबकि कांग्रेस ने रणनीतिक चाल चलते हुए भाजपा समर्थित सदस्यों को अपने खेमे में मिलाकर सहारे दोनों पद अपने पक्ष में कर लिए।

एक वोट से की जीत दर्ज

चुनाव में भाजपा समर्थित सदस्य इशरा मेहता व कली चौहान को कांग्रेस में शामिल कर उन्हें अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया। भाजपा ने रेशमा और महेंद्र कुमार को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बनाया था। दोनों उम्मीदवारों ने बेहद कांटे के मुकाबले में एक-एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम के बाद भाजपा खेमे में मायूसी है, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया।

यह थे समीकरण 

जानकारी के अनुसार, करसोग पंचायत समिति में चुनाव परिणाम आने के बाद कुल 15 सदस्यीय सदन में कांग्रेस समर्थित केवल 4 सदस्य ही निर्वाचित होकर पहुंचे थे। इसके विपरीत भाजपा समर्थित 10 सदस्य और एक निर्दलीय था। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा की जीत लगभग तय हैं। लेकिन मतदान के दौरान हुए घटनाक्रम ने सभी अनुमान गलत साबित कर दिए।

जोड़तोड़ में बाजी मार गई कांग्रेस

बताया जा रहा है कि मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने स्तर पर सदस्यों को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास किए। भाजपा ने भी किसी प्रकार की टूट-फूट रोकने के लिए विशेष रणनीति अपनाई थी। इसके बावजूद अंतिम परिणाम भाजपा की उम्मीदों के विपरीत रहा और संख्या बल होने के बाद भी पार्टी दोनों महत्वपूर्ण पद गंवा बैठी।

चुराग में भी दिखे थे अप्रत्याशित समीकरण

उल्लेखनीय है कि इससे पहले विकास खंड चुराग पंचायत समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव में भी अप्रत्याशित राजनीतिक समीकरण देखने को मिले थे। अब करसोग विकास खंड में भी हुए इस बड़े उलटफेर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत समिति की राजनीति में केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि अंतिम समय की रणनीति और समर्थन भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

फिलहाल करसोग पंचायत समिति का यह चुनाव परिणाम क्षेत्र की राजनीति में बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में पंचायत समिति के भीतर शक्ति संतुलन किस दिशा में जाता है और विकास कार्यों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।