हिमाचल के वित्तीय संकट पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने नीति आयोग में उठाई आवाज

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Chief Minister Sukhu raises the issue of Himachal

शिमला। Chief Minister Sukhu raises the issue of Himachal, मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिमाचल देश को अरबों रुपये की पारिस्थितिकीय सेवाएं दे रहा है, लेकिन बदले में राज्य को उसका जायज हक नहीं मिल पा रहा है।

विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास विषय पर केंद्रित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमाचल के वित्तीय नुकसान का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए।

मुख्यमंत्री ने मानव विकास सूचकांकों में प्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर घोषित हुआ तथा वर्ष 2026 में स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2022 में उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के समय राज्य इस सूचकांक में 21वें स्थान पर था।

उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख किया। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विशेष आमंत्रित सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव केके पंत भी उपस्थित थे।

वित्तीय संकट से उबरने को मांगा 50,000 करोड़ का सहारा

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को करारा झटका लगा है। उन्होंने केंद्र द्वारा दी गई 25,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि को नाकाफी बताते हुए कहा राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं है।

राज्य में विकास कार्यों की रफ्तार को सुचारू रखने के लिए केंद्र सरकार को इस सहायता राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वर्तमान जीएसटी (जीएसटी) व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में हिमाचल को लगभग 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

ग्रीन फ्रंटियर हिमाचल देश को प्रतिवर्ष 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की सेवाएं देता

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक में सिलसिलेवार ढंग से हिमाचल के साथ जुड़े वित्तीय और प्राकृतिक मुद्दों को तथ्यों के साथ पेश किया। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन के मुताबिक, 'ग्रीन फ्रंटियर' हिमाचल देश को प्रतिवर्ष 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पर्यावरण और पारिस्थितिकीय सेवाएं देता है, लेकिन इसकी कोई आर्थिक प्रतिप्रति नहीं मिलती। राज्य में लगभग 13,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, फिर भी राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा।

इसके अलावा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य का 7,000 करोड़ रुपये का बकाया अभी तक अटका हुआ है। भीषण प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलने के बावजूद हिमाचल को केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि का अभी भी इंतजार है।