हिमाचल सरकार के नए निर्देश: वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन में राहत, वेतन वृद्धि पर रोक

हिमाचल सरकार के नए निर्देश: वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन में राहत, वेतन वृद्धि पर रोक

Himachal Government New Directives

Himachal Government's New Directives

Himachal Government's New Directives, हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विनियमन विभाग ने वर्कचार्ज कर्मचारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जारी किए गए हैं, जिसमें वर्कचार्ज स्टेटस से जुड़े मामलों पर स्पष्टता दी गई है। आदेश के अनुसार किसी कर्मचारी की ओर से वर्कचार्ज के रूप में दी गई सेवा उसके नियमित होने के बाद पेंशन और रिटायरमेंट लाभों के लिए मान्य होगी। यानी वर्कचार्ज अवधि को सेवा गणना में शामिल किया जाएगा, लेकिन यह लाभ केवल नियमितीकरण के बाद ही प्रभावी होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्कचार्ज कर्मचारी को किसी प्रकार की वेतन वृद्धि का अधिकार नहीं होगा। ऐसे कर्मचारियों को केवल संबंधित पद के न्यूनतम वेतनमान के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा वर्कचार्ज कर्मचारी को नियमित कर्मचारी की तरह सभी सेवा लाभ तभी मिलेंगे, जब उसका नियमितीकरण हो जाएगा। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी वर्कचार्ज स्टेटस देने का प्रावधान रखा गया है, चाहे वे क्लास-थ्री या क्लास-फोर श्रेणी में हों। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

कोर्ट के फैसलों पर टिप्पणी से बचने और शालीन भाषा का प्रयोग करने के निर्देश
 प्रदेश सरकार ने अदालती मामलों से संबंधित पत्राचार में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया है कि न्यायालयों के आदेशों और फैसलों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या अनावश्यक टिप्पणी न की जाए। सरकार के संज्ञान में बात आई थी कि कुछ मामलों में अधिकारी न्यायालयों के निर्णयों का उल्लेख करते समय अनुचित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और फैसलों पर गैर-जरूरी टिप्पणियां भी कर रहे हैं।

इसे गंभीर और न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में माना गया है। जारी निर्देशों में कहा गया है कि अदालतों के मामलों और निर्णयों से संबंधित सभी पत्राचार में भाषा पूरी तरह से शालीन, विनम्र और सम्मानजनक होनी चाहिए। न्यायालयों के निर्णयों को हल्के में लेने या उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी टिप्पणी से सख्ती से बचने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी दी जाए।