₹657 करोड़ IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: IAS पंकज अग्रवाल बोले- न रिश्वत मांगी, न ली; जमानत याचिका पर 30 जुलाई को सुनवाई

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₹657 crore IDFC First Bank scam: IAS Pankaj Agarwal

चंडीगढ़। ₹657 crore IDFC First Bank scam: IAS Pankaj Agarwal, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में गिरफ्तार हरियाणा के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने सीबीआई कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि उन्होंने कभी न तो रिश्वत मांगी और न ही किसी से रिश्वत ली है।

उनकी एक मात्र भूमिका अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिले प्रस्तावों को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान करने की रही। बता दें कि प्राइवेट बैंक में एक योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धनराशि जमा करवाकर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है, जिसमें अभी तक तीन आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार सिंह और आरके सिंह जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। कई अधिकारियों पर अभी भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है।

सीबीआई ने आईएएस पंकज अग्रवाल को 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में गिरफ्तार किया था। अग्रवाल ने सीबीआई की पंचकूला स्थित स्पेशल कोर्ट में नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की है। इस याचिका पर 30 जुलाई को सुनवाई होगी। सीबीआई ने अग्रवाल को 22 जून को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने अग्रवाल की गिरफ्तारी के समय दावा किया था कि उन्होंने हरियाणा स्कूल शिक्षा प्रोजेक्ट परिषद और हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अकाउंट खोलने में मदद की और उन्हें 60.54 करोड़ रुपये के फ्राड ट्रांजेक्शन के बारे में पता था।

अपनी जमानत अर्जी में अग्रवाल ने दावा किया है कि सीबीआई उन्हें कथित फ्राड से जोडऩे के लिए कोई सबूत नहीं ढूंढ पाई है। यह कहा गया है कि आईडीएफसी फस्र्ट बैंक में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद में अकाउंट खोलने के लिए फाइल को मंजूरी दी थी और फंड अधीनस्थ अधिकारियों से मिले प्रस्ताव के अनुसार रखे गए थे। अकाउंट खोलने के फार्म पर उनका कोई साइन नहीं था।

पंकज अग्रवाल ने कहा कि उन्हें बैंक अकाउंट खोलते समय कथित गड़बड़ियों के बारे में पता नहीं था और न ही उन्हें कभी भी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में डिपार्टमेंट द्वारा मेंटेन किए गए बैंक अकाउंट से धोखाधड़ी से पैसे निकालने के बारे में पता था। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये की लिमिट बाद में हटा दी गई, जिससे यह आरोप कमजोर हो गया कि फैसला असल में गैर-कानूनी था।