हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी के बीच हरियाणा की सियासत गर्म, कांग्रेस के 5 बागी विधायकों को PM मोदी के मंच से भाजपा का बड़ा संदेश

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Haryana politics heats up amidst the flagging off of the hydrogen train

चंडीगढ़। Haryana politics heats up amidst, हरियाणा में कांग्रेस की आंतरिक कलह और राज्यसभा चुनाव के बाद पैदा हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा ने एक बार फिर सियासी चाल चल दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुक्रवार को जींद दौरे से ठीक पहले भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी का साथ देने वाले कांग्रेस के पांच निलंबित विधायकों को जिला स्तरीय कार्यक्रमों के मंच पर प्रमुख स्थान देने का फैसला किया है।

इसे कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष को अधिक गहरा करने तथा बागी विधायकों को भाजपा के राजनीतिक संरक्षण का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

भाजपा ने नारायणगढ़ की बागी कांग्रेस विधायक शैली चौधरी को अंबाला, सढ़ोरा की विधायक रेणुबाला को यमुनानगर, पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास को नूंह, हथीन के विधायक मोहम्मद इसराइल को पलवल तथा रतिया के विधायक जरनैल सिंह को फतेहाबाद जिले के कार्यक्रमों से जोड़ा है। ये सभी कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जींद दौरे के समानांतर जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।

भविष्य की राजनीति में खुले पार्टी के दरवाजे

राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के बाद कांग्रेस ने इन पांचों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद से भाजपा लगातार इन नेताओं को सार्वजनिक और सरकारी आयोजनों में महत्व देती रही है।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले भी दो अवसरों पर इन बागी विधायकों को सरकारी कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाया जा चुका है। लगातार जिला स्तरीय मंचों पर उन्हें जिम्मेदारी देकर भाजपा ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि भविष्य की राजनीति में उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।

असंतुष्ट नेताओं को राजनीतिक संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा एक ओर विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े करना चाहती है।

वहीं दूसरी ओर इन विधायकों के माध्यम से कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को भी राजनीतिक संदेश देना चाहती है। हालांकि कांग्रेस संगठन ने इन विधायकों से दूरी बना रखी है और पार्टी की बैठकों में उन्हें नहीं बुलाया जाता, लेकिन विधानसभा में वे अभी भी तकनीकी और कानूनी रूप से कांग्रेस के विधायक ही हैं।


राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई संवैधानिक खतरा नहीं है। यही कारण है कि वे सदन में कांग्रेस विधायक बने हुए हैं, जबकि राजनीतिक तौर पर भाजपा के साथ उनकी नजदीकियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

बजट सत्र के दौरान भी इन पांचों विधायकों के तेवर कांग्रेस से अलग और भाजपा के समर्थन में दिखाई दिए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से पहले भाजपा द्वारा उन्हें सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराना आने वाले राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।