अरुआ में डंपिंग स्टेशन के स्थान पर अब बनेगी यूनिवर्सिटी!
A university will now be built at the site of the dumping
जे.सी.बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के नये कैंपस हेतु भूमि चिन्हित
- विगत 11 वर्षों से फंसी योजना को भी संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी
- अरुआ ग्राम पंचायत एवं ग्रामीणों की सहमति मिलने से शुरू हुई सकारात्मक पहल
- संस्थान के लिए वर्ष 2015 से अतिरिक्त भूमि की घोषणा एवं आवंटन की प्रक्रिया फंसी हुई
- डंपिंग स्टेशन के लिए प्रस्तावित जमीन पर अब यूनिवर्सिटी का नया कैंपस बनने के आसार
फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: जे.सी.बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के नये कैंपस के लिए भूमि चिन्हित हो गई है। अरुआ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने अपनी सहमति जता दी। गांव में सरकार द्वारा प्रस्तावित डंपिंग स्टेशन का विगत दो साल से ग्रामीण विरोध कर आंदोलन चलाए हुए हैं। अब उसी जमीन पर हरियाणा सरकार के सुझाव से जिला अधिकारी यूनिवर्सिटी के नये कैंपस बनाने का प्रस्ताव लेकर ग्रामीणों के पास पहुंचे जिसे गांव वालों ने स्वीकार कर लिया है। पूर्व सरपंच और वर्तमान सरपंच ने लगभग 143 एकड़ पंचायती जमीन संबंधित सभी दस्तावेज अधिकारियों को सौंप दिए हैं। अधिकारीयों ने ग्रामीणों की सहमति और जमीन संबंधित कागज सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिए जिससे विगत 11 वर्षों से फंसी योजना को भी संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी है। ग्रामीण नये प्रताव से उत्साहित होकर केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और राज्य मंत्री राजेश नागर से भी मिल चुके हैं।
यूनिवर्सिटी विस्तार के लिए गुरुग्राम रोड़ हनुमान मंदिर के सामने लगभग 18 एकड़ भूमि का आवंटन हरियाणा सरकार ( तकनीकी शिक्षा विभाग ) द्वारा किया गया। इसकी घोषणा राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2015 में की। जिसे लेकर तत्कालीन जिला उपायुक्त समीर पाल सरो और मुख्य संसदीय सचिव एवं सीमा त्रिखा ने सक्रिय भूमिका निभाई। उसके उपरांत पूर्व शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा ने इस जमीन आवंटन की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाई। जमीन की कीमत की राशि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जमा कराई गई लेकिन वन विभाग एनओसी देने को तैयार नहीं हैं।
जे.सी.बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के पीआरओ के अनुसार गुरुग्राम रोड़ पर इस नए कैंपस के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जुलाई 2018 में शुरू हुई, जब सरकार द्वारा पहली मंजूरी दी गई। इसके बाद जनवरी 2020 में हरियाणा वित्त विभाग की अंतिम स्वीकृति मिलने पर विश्वविद्यालय ने इस जमीन को आधिकारिक रूप से अपने नाम किया।
फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर स्थित भाखरी गांव के पास नगर निगम की 18 एकड़ भूमि को लगभग 55 करोड़ रुपये में विश्वविद्यालय के नए कैंपस के लिए आवंटित और खरीदा गया।
विश्वविद्यालय का मौजूदा कैंपस नेशनल हाईवे पर सेक्टर-6 में मात्र 20 एकड़ में है, जो विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नए कोर्स शुरू करने के चलते काफी छोटा पड़ रहा। इसी कमी को दूर करने के लिए इस नये और आधुनिक कैंपस की रूपरेखा तैयार करने का प्रयास जारी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन यूनिवर्सिटी के आसपास ही जमीन मिलने की उम्मीद लगाए हुए है हलांकि अरुआ में यूनिवर्सिटी के नये कैंपस के लिए चिन्हित हुई सौ एकड़ जमीन भी मिल जाती है तो कई नए कोर्स शुरू हो पाएंगे और फरीदबाद जिले के युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर करने के अवसर उपलब्ध हो पाएंगे।