Haryana Education Department issues new order, women employees will now

हरियाणा शिक्षा विभाग के नए आदेश पर बवाल, महिला कर्मियों को अब DC से लेनी होगी मंजूरी

undefined

Haryana Education Department issues new order, women employees will now

Haryana Vidyalaya Adhyapak Sangh ने शिक्षा विभाग के उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) लेने की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया गया है। संघ ने इस आदेश को महिला विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

संघ के जिला प्रधान वीरेंद्र सिंह गढ़ी रोडन, सचिव सुदर्शन कुमार, कैशियर बलबीर सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान नरेश, राज्य सचिव रामेश्वर दास और प्रेस प्रवक्ता संजीव जिंदल ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा हरियाणा के नए आदेश के कारण महिला कर्मियों को सीसीएल लेने के लिए अब पहले से अधिक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

संघ नेताओं के अनुसार पहले ही महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव के लिए स्कूल, बीईओ, डीईईओ, डीईओ और निदेशालय के दफ्तरों में आवेदन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब नए आदेश के तहत जिला उपायुक्त (डीसी) से भी अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया और कठिन हो गई है।

संघ का कहना है कि महानिदेशक शिक्षा हरियाणा के आदेश क्रमांक 1/1-2026 प्रशासन (1) दिनांक 9 मार्च 2026 के अनुसार विभाग में कार्यरत महिला कर्मियों के सीसीएल आवेदन पहले संबंधित डीसी से अनुमोदित होंगे, उसके बाद ही डीईईओ और डीईओ के माध्यम से निदेशालय भेजे जाएंगे। इससे साफ है कि महिला कर्मचारियों को अब डीसी कार्यालय के भी चक्कर लगाने पड़ेंगे।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव कोई खैरात नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। ऐसे आदेशों से महिला कर्मचारियों की परेशानी बढ़ेगी और उनके कामकाज पर भी असर पड़ेगा।

उन्होंने सरकार से मांग की कि शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाए और आहरण एवं वितरण अधिकारियों को ही चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल), एसीपी, मकान निर्माण ऋण और अन्य ऋणों को स्वीकृत करने का अधिकार दिया जाए। इससे कर्मचारियों को समय पर लाभ मिल सकेगा और उन्हें बार-बार उच्च अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

संघ नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन “तुगलकी फरमानों” के कारण महिला कर्मचारियों में गहरा रोष है। यदि सरकार ने जल्द ही इस आदेश को वापस नहीं लिया तो कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।