हरियाणा की डायरी: कांग्रेस खेमे में भाजपा के सेंधमारी तरुण भंडारी की बदौलत
Haryana Diary
सचित्र/संपादकीय पृष्ठ हेतु
प्रस्तुति: चन्द्र शेखर धरणी
वरिष्ठ,स्वतंत्र पत्रकार
कांग्रेस खेमे में भाजपा के सेंधमारी तरुण भंडारी की बदौलत
हरियाणा के हालिया राज्यसभा चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीति में केवल संख्या बल ही निर्णायक नहीं होता, बल्कि रणनीतिक कौशल और समय पर लिए गए निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। निर्दलीय उम्मीदवार भले ही चुनाव हार गए हों, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा के रणनीतिकार तरुण भंडारी की भूमिका बेहद अहम रही। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की रणनीति को सार्थकता प्रदान में भंडारी की अहम भूमिका रही।कांग्रेस के पास 37 विधायकों का मजबूत आंकड़ा होने के बावजूद, जिस तरह केवल 28 विधायक ही पार्टी के पक्ष में खड़े नजर आए, उसने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। यह केवल असंतोष का मामला नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का परिणाम प्रतीत होता है। पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करना और चार विधायकों के वोट का निरस्त हो जाना, कांग्रेस के पूरे गणित को बिगाड़ने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।इस पूरे घटनाक्रम में तरुण भंडारी द्वारा तैयार किया गया “चक्रव्यूह” स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने न केवल अपने पक्ष को मजबूत बनाए रखा, बल्कि विपक्ष के भीतर भी प्रभाव डालने में सफलता हासिल की। क्रॉस वोटिंग और वोट निरस्त होने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि चुनावी प्रक्रिया के हर पहलू पर बारीकी से काम किया गया।
जीत के आंसू
हरियाणा के राज्यसभा चुनाव परिणाम ने सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि कांग्रेस खेमे के भीतर भावनाओं का ऐसा विस्फोट भी देखने को मिला जिसने पूरे घटनाक्रम को नाटकीय बना दिया। कांग्रेस प्रत्याशी कर्मबीर सिंह बौद्ध की जीत का ऐलान होते ही पार्टी के कई विधायक भावुक हो उठे।
सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही जब विधायक बीबी बत्रा अपने आंसू नहीं रोक पाए और रो पड़े। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन्हें गले लगाकर संभाला। वहीं रामकरण काला की आंखें भी नम दिखाई दीं, जो इस पूरे घटनाक्रम की भावनात्मक तीव्रता को दर्शाता है।दरअसल, यह पूरा मामला मतदान के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा था। भाजपा ने कांग्रेस के दो वोटों की वैधता पर सवाल उठाए, जिसके चलते मतगणना प्रक्रिया करीब साढ़े पांच घंटे तक शुरू ही नहीं हो पाई। वोट वैध या अवैध हैं—इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच तीखी बहस और खींचतान चली, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।इस बीच, कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि भाजपा अपनी आपत्तियों पर अड़ी रही। लंबे गतिरोध के बाद जब स्थिति स्पष्ट हुई और अंततः कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की घोषणा हुई, तो पार्टी खेमे में जैसे भावनाओं का बांध टूट गया।इसी दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आक्रामक रुख भी सामने आया। उन्होंने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि इस तरह की स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके इस तेवर ने यह संकेत दिया कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण को केवल एक चुनावी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक निष्पक्षता के मुद्दे के रूप में देख रही है।कुल मिलाकर, यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक सीट की जीत-हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक रणनीति, आरोप-प्रत्यारोप और भावनात्मक क्षण—तीनों का संगम देखने को मिला। यह घटनाक्रम आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।
आशिमा बरार की नियुक्ति:37 दिनों बाद ऊर्जा विभाग को मिला नेतृत्व
हरियाणा सरकार ने बिजली (ऊर्जा) विभाग में लंबे इंतजार के बाद स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व बहाल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आशिमा बरार को कमिश्नर एवं सचिव के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब विभाग पिछले करीब 37 दिनों से नियमित मुखिया के बिना कार्य कर रहा था।फरवरी माह में राज्य सरकार ने 1996 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्यामल मिश्रा को ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव पद से रिलीव कर उनकी सेवाएं केंद्र सरकार को सौंप दी थीं। केंद्र में उन्हें दूरसंचार विभाग के अंतर्गत डिजिटल भारत निधि में एडमिनिस्ट्रेटर के पद पर नियुक्ति मिली है। मिश्रा के जाने के बाद ऊर्जा विभाग का कामकाज लिंक ऑफिसर के भरोसे चल रहा था।लिंक ऑफिसर के पास पहले से ही अन्य विभागों का जिम्मा होने के कारण ऊर्जा विभाग के दैनिक कार्यों पर पूरा फोकस नहीं रह पाना स्वाभाविक था। ऐसे में फाइलों का लंबित होना और निर्णय प्रक्रिया में देरी होना भी चर्चा का विषय बना रहा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कई अहम फाइलें लंबित रहीं, जिन पर अब तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।नई नियुक्त कमिश्नर एवं सचिव आशिमा बरार को एक सक्षम और अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न अहम विभागों में काम किया है, जिससे उन्हें प्रशासनिक समन्वय और निर्णय क्षमता का व्यापक अनुभव है। बिजली विभाग जैसे संवेदनशील और जनहित से जुड़े क्षेत्र में उनका यह अनुभव काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।इसके अलावा, ऊर्जा मंत्री की अस्वस्थता के चलते विभाग के मंत्री अनिल विज के स्तर र फाइलों को घर से लगातार निकाला जाता रहा है।।जबकि ऐसे में अब आशिमा बरार के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ लंबित कार्यों को तेजी से निपटाना और दूसरी तरफ आगामी गर्मी के सीजन में बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना।
भाग्य के धनी निकले कर्मवीर बौद्ध
हरियाणा राज्यसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भी खेला होने के बावजूद भी बहुत ही करीबी मुकाबले में मामूली अंतर से राज्यसभा चुनाव जितने में कामयाब रहे। इस दौरान पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग और चार विधायकों की वोट कैंसिल हुई। बड़ी ही आसानी से मिलने वाली जीत बहुत ही कठिनाई से नसीब हुई।
क्या जीत कर भी हारी कांग्रेस
राज्यसभा चुनाव में जीतने के बावजूद भी क्रॉस वोटिंग और रद्द हुई वोटो के चलते पार्टी में पहली बार गद्दारी करने वाले नेताओं के नाम सार्वजनिक ही नहीं किए बल्कि उन्हें नोटिस भी दे दिए हैं। ऐसे में जहां पहले से ही ईमानदारी का नामोनिशान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा । वहीं नैतिकता, अनुशासन जैसे शब्दों ढूंढने से भी नहीं मिल रहे। जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं । आरोपी बनाए गए विधायक जमकर राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के विरुद्ध जहर उगलने के साथ-साथ खुद को पाक साफ बता रहे हैं।
क्या है हाई कमान लगा बड़ा फैसला या 28 को देख होगी लीपापोती
चुनाव में पार्टी से धोखाधड़ी करने वाले नेताओं को एक के बाद एक धड़ाधड़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यही नहीं पार्टी के अन्य नेता ऐसे नेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और बाकी बचे अन्य नेताओं के नाम सार्वजनिक करने की मांग पर अड़े हुए हैं। बाकायदा एक विधायक तो नाम सार्वजनिक करने के लिए धरने पर भी बैठ गया था। जिसको लेकर पूरी पार्टी में घमासान मचा हुआ है। लेकिन 2 साल बाद 2028 में फिर से राज्यसभा चुनाव है ।ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि हाई कमान एक या दो नहीं बल्कि 9 सदस्य क्योंकि रद्द हुई वोटो वाले विधायकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग पार्टी के कई विधायक उठा चुके हैं। ऐसे में फिर से एक सीट राज्यसभा की जितना कांग्रेस के लिए दूर की कौड़ी साबित हो सकता है।
क्रास वोटिंग के आरोपों से बचाव में गवाह मंत्री
राज्य सभा चुनावों के बाद क्रास वोटिंग के आरोपों से घिरी कांग्रेस की नारायण गढ़ से एम एल ए शैली चौधरी ने कहा कि जब उन्होंने वोट डाला , बीजेपी के चुनाव एजेंट मंत्री गौरव गौतम व कृष्ण बेदी ने उनके वोट पर ऑब्जेक्शन लगाया,अगर वोट भाजपा को दिया होता तो यह विरोध क्यों करते। तब10 से 15 मिनट तक भाजपा और कांग्रेस के बीच बहस हुई।तब कांग्रेस के बड़े नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा भी वहां मौजूद थे।अगर ऐसा होता तो हुड्डा को पता होता। शैली चौधरी ने कहा कि गौरव गौतम व बेदी ने उनकी वोट को कैंसिल करने की मांग की थी।वहां लगे कैमरों में सब दृश्य कैद हैं।उन्हें 15 मिनट वहां पर खड़े रखा गया।उसके बाद वोट को वैलिड माना गया।अगर उन्होंने भाजपा को वोट दिया होता तो बीजेपी क्यों उनका वोट कैंसिल करने की मांग करती।अगर इस बात में सच्चाई नहीं है। अगर कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया है तो वह राजनीति छोड़ देंगी।भाजपा सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है शैली चौधरी के द्वारा मत दिखाए जाने की उन्होंने शिकायत की थी।शैली चौधरी ने कहा कि जिन विधायकों के ऊपर क्रॉस वोट के आरोप लग रहे हैं सभी आहत हैं।कांग्रेस उम्मीदवार को 9 वोट कम मिले हैं उन सभी नौ नाम का खुलासा होना चाहिए।उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।जिन विधायकों के वोट कैंसिल हुए हैं वह उनकी पसंद के विधायक है उनको बचाने की कोशिश की जा रही है।कांग्रेस में गुट बाजी चरम सीमा पर है केवल पसंद नपसंद के खेल में कांग्रेस को तोड़ा जा रहा है।
हरियाणा मेट्रो ने पकड़ी रफ्तार
हरियाणा के शहरी परिवहन नेटवर्क ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2025-26 में मेट्रो यात्रियों की संख्या में 13.55 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो सार्वजनिक परिवहन की तरफ यात्रियों के बढ़ते विश्वास और स्पष्ट रुझान को दर्शाती है। यह उपलब्धि आज यहां मुख्य सचिव एवं एचएमआरटीसी के अध्यक्ष श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एचएमआरटीसी) बोर्ड की 64वीं बैठक के दौरान सामने आई।अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच मेट्रो नेटवर्क का उपयोग करने वाले यात्रियों की संख्या 1.74 करोड़ से अधिक रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.53 करोड़ था। जुलाई माह में सर्वाधिक 22.93 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अन्य सभी महीनों में भी सकारात्मक वृद्धि रही। यह परिचालन की विश्वसनीयता, सेवाओं में सुधार और यात्रियों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है।
वित्तीय दृष्टि से भी एचएमआरटीसी का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। जनवरी 2026 तक किराया राजस्व में 12.64 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं, गैर-किराया राजस्व में 108 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि स्टेशन परिसरों के बेहतर उपयोग, विज्ञापन और व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त आय के कारण संभव हुई है। स्टेशनों के नामकरण अधिकारों की नीलामी तथा अतिरिक्त विज्ञापन स्थलों के विकास जैसी पहलों से एचएमआरटीसी की वित्तीय स्थिति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बडौली ने कांग्रेस व इनेलो पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है। इस दौरान उन्होंने हरियाणा बजट, राज्यसभा चुनाव, ईरान-अमेरिका, इजराइल युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक संकट व विकास परियोजनाओं पर चर्चा की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। हरियाणा के मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रस्तुत किया गया बजट प्रदेश को “विकसित हरियाणा” के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर करने वाला दूरदर्शी एवं जनकल्याणकारी बजट है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी मजबूत आधार प्रदान करता है। विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय बार-बार वॉकआउट कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास किया। सदन के भीतर अपनी बात रखने के बजाय विपक्ष ने मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने और सुर्खियां बटोरने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं के अनुरूप नहीं है। हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी संजय भाटिया के निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई दी। एक सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान विभिन्न दलों के विधायकों ने अपने विवेक और अंतरात्मा के अनुसार मतदान किया।
जल जीवन मिशन-2.0 का हुआ एमओयू
हरियाणा में जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को लागू करने के लिए शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हरियाणा सरकार की ओर से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री मोहम्मद शाइन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एमओयू हस्ताक्षरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल जीवन मिशन-2.0 के अंतर्गत राज्य सरकारों व केंद्र सरकार के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आज हुआ यह एमओयू बहुत महत्वपूर्ण है। जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में राज्य सरकार का ध्यान केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्थिरता और दीर्घकालिक प्रबंधन पर भी केंद्रित होगा। इसके तहत जल भंडारण टैंकों का आधुनिकीकरण, शेष परिवारों को पाइप लाइन जल आपूर्ति से जोड़ना और दक्षिण हरियाणा के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों जैसे नूहं, पलवल और महेंद्रगढ़ में विशेष परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन सभी योजनाओं पर लगभग 3000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के पहले चरण में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल और पर्याप्त पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने का राज्य सरकार ने जो संकल्प लिया, उसे साकार भी किया। वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की जब शुरुआत हुई थी तब हरियाणा में केवल 58 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में नल का कनेक्शन था, लेकिन सरकार के सतत प्रयासों से 6 अप्रैल, 2022 को ही सरकार ने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। यह उपलब्धि हरियाणा के लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है।उन्होंने कहा कि एक समय था जब महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था, लेकिन अब महिलाओं को उनके घरों में ही स्वच्छ जल उपलब्ध कराने से आए परिवर्तन सामाजिक सम्मान और जीवन स्तर में सुधार का प्रतीक है।
प्रस्तुति:चन्द्र शेखर धरणी