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ऑटो चलाने को मजबूर पूर्व नैशनल बॉक्सर आबिद खान, आनंद महिंद्रा ने बढ़ाया मदद का हाथ

चंडीगढ़। पिछले 20 साल से ऑटो चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज व एनआइएस क्वालीफाइड बॉक्सिंग कोच आबिद खान की मदद के लिए जाने माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने एक वीडियो पर रिट्वीट करते हुए कहा कि आबिद की स्टोरी बताने के लिए धन्यवाद। मैं उनकी सराहना करता हूं कि वो कोई मदद नहीं मांग रहे हैं। फिर भी मैं लोगों को चैरिटी ऑफर करने के बजाय उनकी प्रतिभा और जुनून में निवेश करना पसंद करता हूं। कृपया मुझे बताएं कि मैं कैसे उनकी स्टार्टअप बॉक्सिंग अकादमी में निवेश कर सकता हूं और उन्हें सपोर्ट कर सकता हूं।

बता दें, 61 वर्षीय आबिद खान राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीते चुके हैं। बॉक्सिंग के प्रति अपने जुनून को बनाए रखने के लिए उन्होंने साल 1988 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पो‌र्ट्स पटियाला से मुक्केबाजी का डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने पांच तक आ‌र्म्ड फोर्सज के बॉक्सर्स को बॉक्सिंग के गुर सिखाए। धीरे -धीरे उम्र के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती गई लेकिन आबिद को कोई नौकरी नहीं मिली। पैसे कमाने की चाह में विदेश में भी गए, लेकिन वहां भी मजदूरी ही करनी पड़ी। वापस लौटकर सब्जी मंडी में पिछले 20 सालों से ऑटो चला रहे हैं। वायरल वीडियो में आबिद खान ने दो टूक कहा कि बॉक्सिंग में मिडिल क्लास या गरीब तबके के ही लोग आते हैं क्योंकि इसमें मार खानी पड़ती है। गरीब आदमी का स्पो‌र्ट्स लवर होना समय की बर्बादी है इसीलिए उन्होंने अपने बेटों को स्पो‌र्ट्स में करियर न बनाने की सलाह दी।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद ओलंपिक मेडल विजेता विजेंदर सिंह, मनोज कुमार, अभिनेता फरहान अख्तर ने भी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से उनकी मदद करने की इच्छा जताई। इस पर आबिद खान ने एक और वीडियो मैसेज से अपील की कि वह मदद नहीं चाहते हैं। उन्हें सिर्फ एक बॉक्सिंग अकादमी में नौकरी मिल जाए, तो वह देश के लिए चैंपियंस की टीम तैयार कर दें।

आबिद खान की उपलब्धियां

  • 1982 में फिल्लौर में आयोजित नोर्थ इंडिया सीनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल।
  • 1983 में शिमला में आयोजित नार्थ इंडिया सीनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल।
  • 1985 में चंडीगढ़ में आयोजित नोर्थ इंडिया सीनियर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल।

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