Electricity workers will hold a massive protest in Sector 17 on January 30 and will observe Black Day on January 31.बिजली कर्मी 30 जनवरी को सैक्टर 17 में देंगे

बिजली कर्मी 30 जनवरी को सैक्टर 17 में देंगे विशाल धरना व 31 जनवरी को मनायेंगे काला दिवस।

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Electricity workers will hold a massive protest in Sector 17 on January 30 and will observe Black Da

 चण्डीगढ़ के बिजली कर्मचारी 30 जनवरी 2026 को सेक्टर 17 में विशाल धरना देंगे तथा31 जनवरी 2026 को काला दिवस मनाकर गैर कानूनी तौर पर चण्डीगढ़ प्रशासन के अधीन काम कर रहे सरकारी बिजली कर्मचारियों को बिना कर्मचारियों की मर्जी के निजी कम्पनी ऐमीनेंट में धकेलने का विरोध करेंगे। यह निर्णय यूनियन के मुख्य पदाधिकारियों की सैक्टर 18  में हुई मीटिंग में लिया गया। 


    मीटिंग में चण्डीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की कार्य प्रणाली की तीखी निन्दा करतरे हुए आरोप लगाया कि पिछले साल 31 जनवरी को मुनाफे में चल रहे बिजली विभाग को सीधे तौर पर निजी कम्पनी को बेच दिया गया तथा 349 कर्मचारियों को विरोध के बावजूद बलि का बकरा बना कर निजी कम्पनी ऐमीनेंट में धकेल दिया गया जो देश के इतिहास में काला अध्याय है। 


    मीटिग में आरोप लगाया कि उस समय के सिविल के मुख्य अभियन्ता ने तत्कालीन हरियाणा से बुलाये अधीक्षक अभियन्ता के साथ मिलकर एक गहरी साजिश कर कर्मचारियों के साथ धोखा किया तथा गल्त टैन्डर प्रणाली लागू कर सरकार तथा उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखा। 


    2022 में अधिकारियों द्वारा अपनी गल्ती मानकर सुधारने की बात भी कही थी लेकिन दुख की बात है कि वर्तमान मुख्य अभियन्ता व उनके अधीन काम कर रहे अधिकारी भी उसी गल्ती को पुनः दोहरा रहे हैं तथा बिजली वितरण के अलावा पारेषण (ट्रांसमिशन) को भी निजी कम्पनी को सौप रहे हैं जबकि 31 जनवरी 2025 की नोटिफिकेशन में ट्रांसमिशन केअसैट कम्पनी को नहीं सौपने की बात कही है लेकिन उस नोटिफिकेशन की भी धज्जियां उडाई जा रही है तथा 31 जनवरी 2026 से पहले निजी कम्पनी को सौंपने की ज़ोर ज़ोर से तैयारी चल रही है जबकि कम्पनी के पास ट्रांसमिशन का लासेंस भी नहीं है। विभाग के सम्बन्धित अधिकारी इस सम्बन्ध में कानूनी तौर पर ट्रांसमिशन को अपने पास रखने की दलील भी दे रहे हैं तथा एसटीयू, एस एल डी सी, ईआई, एसडीए के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी मांग रहे हैं लेकिन उनकी दलील को भी ठुकराने की बात चल रही है। यूनियन की मीटिंग में इस बात की भी चर्चा की गई कि अगर 11-66 केवी, 5-33 केवी तथा 1-220 केवी सब स्टेशन सरकारी कम्पनी बनने तक सरकार के अधीन रहते तो 250 से अधिक कर्मचारी अडजैस्ट हो सकते थे, लेकिन अधिकारियों को कर्मचारियों की नहीं कम्पनी की ज्यादा चिन्ता थी इसलिए एसटीयू, एस एल डी सी,ई आई व एस डीए के अगेंस्ट सिर्फ अपने चाहते 43 कर्मचारी व अधिकारी ही रखे गये, जिनकी विभाग में नौकरी 10 -15 साल की ही थी ,दूसरी तरफ 25 -30 -35 से लेकर 40 साल तक की नौकरी कर चुके कर्मचारियों को कंपनी में धकेल दिया गया, कम्पनी में नुक्सान होने के नाम पर 165 कर्मचारियों को 1 दिन में ही बी आर एस दे दी गई तथा 22 हैन्डीकैप कर्मचारियों को अन्य विभागों में अडजैस्ट कर दिया तथा 349 कर्मचारियों को अपने हाल पर छोड़ दिया जो कि पिछले एक साल से दर दर की ठोकर खा रहे हैं क्योंकि उन्हें नुक्सान खाने के लिए छोड़ दिया। मीटिंग में प्रशासन से सवाल किया कि एक तरफ तो नुक्सान न हो करके कुछ कर्मचारियों को विभाग में व अन्य सरकारी विभागों में अडजैस्ट किया गया व अन्य 349़ को निजी कम्पनी में भेज दिया, यह कहां का न्याय है? इस बात पर प्रशासन चुप्पी साधकर बैठा है, पर कर्मचारी अपनी पहले से मिल रही सहूलियतों को एक एक कर खोते जा रहे हैं। पहले उनको मकानों की अलाटमेंट बन्द कर दी, फिर उन्हें बैंकों से लोन मिलना बन्द हो गया, स्कूलों में एडमिशन की रियात बन्द हो गई। सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज पर रोक लग गई।

 

फरवरी के महिने में होने वाली प्रमोशन नहीं मिली व रिजरवेशन पर अंकुश लग गया, उनका सरकारी दर्जा खत्म हो गया। यहां तक कि 12 महिने  के प्रोविजनल पिरीयंड में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन व जी पी फन्ड नहीं दिया जा रहा। सरकार रिटायरमेंट आर्डर जारी न कर पीपीओ जारी न होकर उन पर सैन्ट्रल गर्वनमेट हैल्थ स्कीम भी लागू नहीं है। यहां तक कि डैथ वैड़ पर बैठे कर्मचारी को केन्द्र के नियमों के तहत पिछले 6-7 महिने से बी आर एस भी नहीं दी जा रही है। पेंशन, कम्पूटेशन, ग्रेच्युटी के सिर्फ सपने दिखाये जा रहे हैं। इसलिए कर्मचारी किंकर्त्तव्यविमूड़ होकर भ्रष्टाचारिरयों के हाथों ठगा महसूस कर रहे हैं व न्यायालयों से उम्मीद लगाकर अपने मनको तसल्ली दे रहे हैं लेकिन लाचार नहीं है तथा 31 जनवरी को संघर्ष का शंखनाद कर इन भ्रष्ट व दोषी अधिकारियों को भी कठघरे में खड़ा करने की ठान चुके हैं जो अपने तुच्छ स्वार्थो के लिए 25-30-35-40 साल की नौकरी पूरी कर चुके कर्मचारियों को सरकारी पेंशन के लिए मोहताज करने की कोशिश में लगे हैं। 


    यूनियन के पदाधिकारियों ने सभी कर्मचारियों से 30 जनवरी को सैक्टर 17 में दिए जाने वाले धरने मे तथा 31 जनवरी 2026 को  मनाये जा रहे काला दिवस रोष प्रदर्शनों में भारी गिनती में शामिल होने की अपील की है। 
जारीकर्त्ता 
गोपाल दत्त जोशी 
महासचिव