हिमाचल में लोकमित्र केंद्रों पर डिजिटल स्ट्राइक: ओवरचार्जिंग की तो ब्लॉक होगी आईडी
Digital strike on Lokmitra centres in Himachal
शिमला। लोकमित्र और आधार केंद्रों पर सरकार ने सख्ती की है। अब लोकमित्र केंद्र संचालक यदि सरकार द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क से अधिक राशि वसूलेगा तो उसकी आइडी ब्लाक कर दी जाएगी। पहली बार ऐसा करते पाए जाने पर संबंधित केंद्र की कामन सर्विस सेंटर आइडी को एक महीने के लिए ब्लाक कर दिया जाएगा। इसके साथ उसे चेतावनी दी जाएगी।
बार-बार उल्लंघन की स्थिति में निलंबन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यदि संचालक नहीं सुधरा और बार-बार नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसकी आइडी को स्थायी रूप से रद भी किया जा सकता है। डिजिटल टेक्नोलाजी एंड गवर्नेंस विभाग ने शनिवार को एसओपी जारी कर दी है। विभाग के निदेशक डा. निपुण जिंदल ने इसकी पुष्टि की है।
सरकारी परिसर में ही चलेंगे आधार केंद्र
आधार आपरेटरों को केवल अधिकृत सरकारी परिसरों से ही कार्य करने की अनुमति होगी और उन्हें यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथारिटी आफ इंडिया द्वारा निर्धारित स्थान संबंधी मानकों का पालन करना होगा। यदि कोई आपरेटर स्वीकृत स्थान से बाहर आधार नामांकन गतिविधियां संचालित करता या फर्जी आधार नामांकन में संलिप्त पाया तो उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन सहित नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
7900 लोकमित्र केंद्रों में 77 तरह की सेवाएं
प्रदेश में 7900 लोकमित्र केंद्र कार्यरत हैं, इनमें 77 तरह की सेवाएं मिलती हैं। हर सेवा का शुल्क तय है। हिम बस कार्ड बनाने का शुल्क 25 रुपये तय है। इसी तरह अन्य तरह के सर्टिफिकेट बनाने के शुल्क भी तय किए हैं। सभी लोकमित्र केंद्रों को अपने केंद्रों पर सेवाओं की आधिकारिक दर सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। लोगों को भी सलाह दी है कि वे किसी भी सेवा का भुगतान करने से पहले प्रदर्शित दरों की जांच करें। ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर प्रत्येक तिमाही में कम से कम 15 लोकमित्र केंद्रों का निरीक्षण करेंगे।
इस तरह की जा सकेगी शिकायत
लोकमित्र केंद्रों के कार्य से संबंधित शिकायतें मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100, आधिकारिक शिकायत पोर्टल, ईमेल या जिला प्रशासन के माध्यम से की जा सकती हैं। शिकायत प्राप्त होने पर जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी द्वारा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को स्थल निरीक्षण कर साक्ष्यों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन राजस्व विभाग या अन्य संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जांच भी करवा सकता है।