रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए बराबर के इंश्योरेंस कवर की मांग तेज

रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए बराबर के इंश्योरेंस कवर की मांग तेज

Demand for Equal Insurance Coverage for Robotic

Demand for Equal Insurance Coverage for Robotic

अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली , नई दिल्ली में पार्टनरशिप टू फाइट क्रॉनिक डिजीज (PFCD) द्वारा आयोजित पैनल चर्चा में देश के प्रमुख ऑर्थोपेडिक एथलीटों ने भारत में तेजी से बढ़ते आर्थराइटिस के बोझ और सर्जरी गैप के बीच रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए बेहतर और बराबर वाले इंश्योरेंस कवर की जरूरत पर जोर दिया।

एथनिक के अनुसार भारत में हर साल लगभग 2.5–3.5 लाख जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी होती हैं, लेकिन इनमें से केवल 5–10% ही रोबोटिक असिस्टेड टेक्नीक से की जाती हैं। यह टेक्नीक अभी मुख्य रूप से बड़े शहरों के चुनिंदा अस्पतालों तक सीमित है, जहां एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित सर्जन उपलब्ध हैं।

डॉक्टर ने बताया कि रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सर्जिकल कीमत बढ़ाने, रिकवरी समय कम करने और लंबे समय में बेहतर परिणाम देने में मददगार है। CT-बेस्ड प्लानिंग के जरिए सर्जरी को मरीज के शरीर के अनुसार कस्टमाइज किया जाता है, जिससे जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है और जॉइंट फंक्शन बेहतर होता है।

 इसके बावजूद, इस तकनीक की पहुंच सीमित होने का सबसे बड़ा कारण बीमा से जुड़ी बाधाएं हैं। कई मामलों में बीमा कंपनियां रोबोटिक सर्जरी को आंशिक रूप से कवर करती हैं, उस पर सब-लिमिट लागू करती हैं या इसे कवर ही नहीं करतीं। नतीजतन, मरीजों को अपनी चिकित्सा जरूरत के बजाय आर्थिक क्षमता के आधार पर निर्णय लेना पड़ता है।

हालांकि भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने 2019 में आधुनिक उपचारों को कवर में शामिल करने के दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन एथलीटों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब भी रिम्बर्समेंट में असमानता और पॉलिसियों में उदासीनता बनी हुई है।

पैनल का यह भी असर है कि बीमा फ्रेमवर्क को केवल शुरुआती लागत पर नहीं, बल्कि इलाज के कुल मूल्य पर ध्यान देना चाहिए। रोबोटिक सर्जरी बेहतर इम्प्लांट पोजीशनिंग, कम प्रभाव और कम रिवीजन सर्जरी की जरूरत जैसे फायदे देती है, जिससे लंबे समय में मरीजों और हेल्थकेयर सिस्टम दोनों को लाभ होता है।

पैनल में शामिल एथलीटों ने कहा कि मौजूदा स्थिति में डॉक्टरों को मरीजों के लिए सबसे बेहतर इलाज और उनकी आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।  कई अस्पताल भी रिम्बर्समेंट की अनिश्चितता के कारण इंश्योर्ड फीस के लिए रोबोटिक सर्जरी की पेशकश सीमित कर देते हैं।

PFCD ने जोर दिया कि रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट को “लग्जरी” के बजाय एक जरूरी और वैल्यू-ड्रिवन मेडिकल रिकवरी के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि बराबर वाला इंश्योरेंस कवर सुनिश्चित होने से फीस को बेहतर इलाज तक पहुंच मिलेगी और देश के हेल्थकेयर सिस्टम को भी बढ़ावा मिलेगा।