जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के आरोपों पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, पुलिस से मांगा जवाब
Delhi High Court takes a stern view of allegations
नई दिल्ली। Delhi High Court takes a stern view of allegations, जंतर-मंतर पर धरना देर रहे प्रदर्शनकारियों की निगरानी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि क्या इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी।
इसके जवाब में दिल्ली पुलिस की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई निगरानी नहीं की जा रही है और जंतर-मंतर पर हर विरोध प्रदर्शन को हमेशा रिकॉर्ड किया जाता है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए है। कोई निगरानी नहीं हो रही है। इस पर पीठ ने कहा कि मामले पर मंगलवार को सुनवाई की जाएगी।
निजता को बताया था व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
2017 में सुप्रीम कोर्ट अपने निर्णय में सर्वसम्मति से कहा था कि निजता, संविधान के अनुच्छेछ-21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकार द्वारा की जाने वाली कोई भी निगरानी कानूनी, जरूरी और मकसद के अनुपात में होनी चाहिए।

पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशे घोष ने दायर की थी याचिका
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशे घोष ने याचिका दायर कर कहा कि यह प्रदर्शनकारियों की निजता, सम्मान, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। घोष ने आरोप लगाया कि 20 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरने और भूख हड़ताल की शुरुआत के बाद से ही प्रदर्शनकारियों की लगातार फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी की जा रही है।
याचिका में कहा गया कि निगरानी की इस व्यवस्था का इस्तेमाल छात्र प्रदर्शनकारियों को डराने और रोकने के लिए किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने बार-बार विरोध स्थल के अंदर मार्च किया और प्रदर्शनकारियों को ले जा रही गाड़ियों को रोककर पूछताछ की।