झारखंड में 'कुर्सी' प्रेम पर प्रहार: वित्त मंत्री का आदेश- 5 साल से एक ही जगह जमे कर्मियों का होगा तबादला
Cracking Down on 'Chair' Attachment in Jharkhand
वित्त मंत्री ने पांच साल से अधिक कर्मियों के स्थानांतरण का आदेश दिया।
झारखंड में पुलिस अकाउंटेंट, लिपिक संवर्ग में लंबे समय से स्थानांतरण नहीं।
रांची। Cracking Down on 'Chair' Attachment in Jharkhand, राज्य में इक्का-दुक्का को छोड़ एक ही जिले में लंबे समय से पुलिस के अकाउंटेंट जमे हुए हैं। उनके एकमुश्त स्थानांतरण की कभी पहल नहीं की गई है। कई जगहों पर तो अलग राज्य गठन के बाद से ही अकाउंटेंट पदस्थापित हैं, जिनका स्थानांतरण कभी हुआ ही नहीं। हालांकि, इस मामले को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने गंभीरता से लिया है।
उन्होंने आदेश दिया है कि एक ही जगह पर पांच साल से अधिक समय से पदस्थापित कर्मियों का स्थानांतरण करें। मंत्री के आदेश के बाद विभाग में इसे लेकर हलचल भी है। स्थानांतरण-पदस्थापन का यही हाल सिपाही, हवलदार संवर्ग में भी है।
जब तक कोई स्वयं स्थानांतरण के लिए पुलिस शिकायत काेषांग को आवेदन नहीं देता है या फिर किसी के विरुद्ध कोई आरोप नहीं लगता है, तब तक उसका स्थानांतरण नहीं होता है। राज्य में सिपाही-हवलदार संवर्ग में करीब 63000 जवान हैं।
लिपिक, उच्च वर्गीय लिपिक संवर्ग में करीब 1000, एएसआइ से इंस्पेक्टर रैंक में करीब 12 हजार पदाधिकारी राज्य में कार्यरत हैं। पदाधिकारियों के स्थानांतरण-पदस्थापन का आदेश तो निकलता रहा है, सिपाही, हवलदार, लिपिक, उच्च वर्गीय लिपिक संवर्ग में एकमुश्त स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से कोई पहल नहीं की गई है।
प्रोन्नत होने के बावजूद वे अपने उसी जिले में पदस्थापित हैं। लिपिक व उच्च वर्गीय लिपिक संवर्ग में सर्वाधिक संख्या उग्रवादी हिंसा के बलिदानियों के आश्रितों की है। ये पुलिस विभाग के अलावा सचिवालय सहायक संवर्ग में भी कार्यरत रहे हैं।
स्थानांतरण नहीं होने के पीछे तकनीकी पेंच भी है बड़ी वजह
पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि लिपिक, उच्च वर्गीय लिपिक के स्थानांतरण को लेकर पुलिस मैनुअल में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनके अवधि को लेकर भी कोई बाध्यता नहीं है। इसी तरह सिपाही, हवलदार के मामले में भी है।
स्थानांतरण नहीं होने के पीछे तकनीकी पेंच भी है। जिलों को स्वीकृत बल के अनुरूप प्रत्येक कैटोगरी में बल आवंटित होता है, जो उस जिले के लिए होता है। उस सिपाही-हवलदार का उसी जिले में संबंधित एसपी के माध्यम से स्थानांतरण-पदस्थापन हो सकता है।
शिकायत कोषांग के माध्यम से आवेदन देने पर उसपर विचार होता है। यही वजह है कि इक्का-दुक्का ही स्थानांतरण पदस्थापन होता है।