कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रम फैला रहे हैं... मणिकर्णिका घाट विवाद पर बोले सीएम योगी

कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रम फैला रहे हैं... मणिकर्णिका घाट विवाद पर बोले सीएम योगी

Manikarnika Ghat Controversy

Manikarnika Ghat Controversy

Manikarnika Ghat Controversy: सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी में एक प्रेस कांफ्रेंस कर मणिकर्णिका घाट विवाद कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने एआई जेनरेटेड वीडियो के जरिए मंदिरों को तोड़े जाने का भ्रम फैलाने और जनभावनाओं को भड़काने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास चाहे काशी का हो चाहे देश का, कांग्रेस ने हमेशा बैरियर का काम किया है। मणिकर्णिका घाट का एआई से वीडियो बनाकर जनभावनाओं को भड़काने का काम कांग्रेस के लोगों ने किया है। मैं स्पष्ट चेतावनी दे रहा हूं कि काशी को बदनाम करने वालों के इस कृत्य का पर्दाफाश किया जाएगा। जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी हरकत को सरकार स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंंने कहा कि पिछले तीन-चार दिनों से अनर्गल और झूठी तस्वीरें पेश कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस को इसके सिवाय कुछ आता ही नहीं। कांग्रेस ने हमेशा विरासत को बदनाम करने का कार्य किया है। कांग्रेस ने लोकमाता अहिल्याबाई का कभी सम्मान नहीं किया। कांग्रेस नेताओं के बचकाने बयान और हरकत देखकर उनपर हंसी भी आती है और दया भी। इनका यह कृत्य वैसे ही है जैसे नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज पर चली। इन लोगों ने विरासत का सदैव अपमान किया। आज वे विकास कार्यों में बाधा पैदा करने का काम कर रहे हैं। काशी और देश की विरासत को अपमानित करने वाली कांग्रेस यही करती रहती है। विश्वनाथ धाम का निर्माण हो, अयोध्या में पांच सौ वर्षों बाद मंदिर निर्माण हो, विंध्यवासिनी धाम या फिर प्रयागराज का विकास ही क्यों न हो। हर बार कांग्रेस के लोगों ने अनरगल टिप्पणी और झूठा प्रचार किया। विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय तो हद ही कर दी। कार्यशाला से टूटी हुई मूर्तियां लाकर उसे विश्वनाथ धाम में तोड़ी गई मूर्तियां कहकर प्रचारित-प्रसारित किया गया। विरासत का सम्मान कैसे होता है यह हमें कांग्रेस से पूछने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस की हकीकत यह है कि जब लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य किया तो प्रधानमंत्री रहते हुए जवाहर लाल नेहरू ने पत्र लिख कर देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से उस कार्य से दूर करने का अनुरोध किया था।

मणिकर्णिका प्रोजेक्ट के मूल में जनहित

मुख्यमंत्री ने कहा मणिकर्णिका घाट के प्रोजेक्ट को बदनाम करने का काम किया जा रहा है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मणिकर्णिका घाट के विकास का प्रोजेक्ट यह सुनिश्चित करने के लिए अमल में लाया जा रहा कि लोग इस पवित्र स्थल पर स्वजनों को सम्मान पूर्वक अंतिम विदाई दे सकें। यहां जो कुछ भी किया जा रहा है उसकी मूल भावना जनहित ही है। न सिर्फ यहां अंतिम संस्कार करने के लिए आने वालों को सुविधा होगी बल्कि जो लोग आसपास के मोहल्लों में रहते हैं उन्हें चिताओं से उठने वाले धुएं के कारण जो परेशानी होती है उससे भी मुक्ति मिलेगी। बाढ़ के समय लोगों को अधजली चिताएं छोड़कर नहीं जाना होगा। गंगा के अधिकतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर शवदाह के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा।

कांग्रेस की सरकारें नहीं दे सकीं काशी को सम्मान

स्वतंत्रता के बाद काशी को विश्वस्तर पर जो सम्मान मिलना चाहिए था वह कांग्रेस की सरकारें नहीं दे सकीं। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी को नए सिरे से वैश्विक पहचान मिली है तो कांग्रेस के लोग यह सहन नहीं हो पा रहे हैं। 11 साल पहले तक काशी की स्थिति यह थी कि यहां रोजाना पांच से 25 हजार लोग ही आते थे। अब यह औसत सवा से डेढ़ लाख पहुंच चुका है। प्रमुख पर्वों त्यौहारों पर यह संख्या छह से दस लाख पहुंच जाती है। सिर्फ पिछले साल ही 11 करोड़ से अधिक लोग विश्वनाथ धाम पहुंचे। जो विकास में बाधक हैं उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। कांग्रेस के कार्यकाल में गंगा का जल आचमन तो दूर स्नान योग्य भी नहीं रह गया था। अब काशी की गंगा में स्नान और आचमन दोनों किया जा सकता है।