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मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह ने कॉलेजों की परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान, विद्यार्थी पिछले साल के नतीजों के आधार पर किए जाएंगे परमोट

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री ने शनिवार को राज्य में कोविड महामारी के चलते यूनिवर्सिटी और कालेजों की परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया परन्तु कुछ यूनिवर्सिटियों की तरफ से ऑनलाइन ली जा रही परीक्षाएं बेरोक जारी रहेंगी।

अपने साप्ताहिक ‘कैप्टन को सवाल’ फेसबुकलाइव सैशन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनिवर्सिटी और कालेजों के विद्यार्थी पिछले साल के नतीजों के आधार पर परमोट कर दिए जाएंगे। हालाँकि जो विद्यार्थी अपने प्रदर्शन को और सुधारना चाहते हैं, उनको बाद में नये इम्तिहानों के द्वारा मौका दिया जायेगा जब कोविड संकट दूर हो जायेगा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटियाँ और कालेजों की तरफ से इस फ़ैसले को लागू करने के तरीकों पर काम किया जा रहा है जिस कारण इस संबंधी विस्तार में फ़ैसले का ऐलान अगामी कुछ दिनों में किया जायेगा।

स्कूल बोर्ड परीक्षाओं संबंधी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में सी.बी.एस.ई. के ऐलाने फ़ैसले को लागू करेगा।

इसके साथ ही कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि वह अपनी परीक्षाएं रद्द होने के बावजूद अपनी पढ़ाई ज़रूर जारी रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा, ‘आप अपने सुनहरी भविष्य के लिए अपनी पढ़ाई जारी रखें।’

इसी दौरान पूर्व सैनिकों के लिए किये बड़े फ़ैसले का ऐलान करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिक उम्मीदवारों के लिए पी.सी.एस. परीक्षाएं देने के लिए कोशिशों में विस्तार कर दिया गया है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार आम श्रेणियों में से एस.सी.उम्मीदवारों को मिलते असीमत मौके जारी रहेंगे। इसके साथ ही जनरल केटेगरी के पूर्व सैनिकों को ओवर आल जनरल केटेगरी की तरह छह मौके मिलेंगे जबकि इससे पहले उनको चार मौके मिलते थे। बी.सी. केटेगरी के पूर्व सैनिकों की कोशिशों भी बढ़ा कर 9 कर दिया गया हैं। उन्होंने कहा कि पी.सी.एस बनने के इच्छुक पूर्व सैनिकों की तरफ से उनके पास कई विनतियाँ पेशे की गई थीं कि आम जनरल वर्ग जितने मौके उनको भी दिए जाएं।

आर्डीनैंसों के विरुद्ध केंद्र के साथ लड़ाई लड़ूंगा

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज कहा कि अकालियों ने राज्य की किसानी को तबाह कर देने वाले किसान विरोधी आर्डीनैंसों के प्रति समर्थन देकर पंजाब के हित बेच दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान विरोधी आर्डीनैंसों के विरुद्ध वह केंद्र सरकार के साथ लड़ाई लड़ेंगे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह जल्द ही प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के मिलने के लिए समय मांगेगे। उन्होंने बताया कि भाजपा को छोड़ कर पंजाब की सभी पार्टियों ने प्रधानमंत्री को मिलने का फ़ैसला सर्वसम्मति से लिया था।

शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सावधान किया, ‘‘सुखबीर बादल या भाजपा वाले चाहे कुछ भी कहे जाएँ, यदि एक बार आर्डीनैंस पास हो गए तो केंद्र सरकार की तरफ से अपने अगले कदम में न्यूनतम समर्थन मूल्य को ख़त्म करने के साथ-साथ एफ.सी.आई. को भी तोड़ दिया जायेगा।’’ उन्होंने कहा,‘‘स्वयं आप इसकी कल्पना कर सकते हो कि यदि यह सब कुछ हकीकत में बदल गया तो पंजाब के किसानों के साथ क्या होगा।’’

उन्होंने कहा कि यदि यह आर्डीनैंस कानूनी रूप में लागू हो गए तो खरीद प्रक्रिया ख़त्म हो जायेगी और मंडी का भी अंत हो जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों को सिफऱ् अपने राजनैतिक लाभ पालने में रूचि है और हरसिमरत बादल को केंद्रीय कैबिनेट में अपनी कुर्सी बचाने का फिक्र लगा रहता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में बादल किसी भी कीमत पर पंजाब में गठजोड़ बचाने के लिए भाजपा को खुश करने में लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अकालियों को अपने राजनैतिक हितों के साथ ही सरोकार है। सुखबीर चाहता है कि उसकी पत्नी केंद्रीय कैबिनेट में बैठी रहे जबकि वह आप प्रधान बना रहे। वह पंजाब के बारे में नहीं सोचते बल्कि उन पर व्यक्तिवाद भारी है।’’ उन्होंने कहा कि इतिहास भी इस तथ्य की गवाही भरता है।

पंजाब और इसके हितों को बचाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आर्डीनैंस 100 प्रतिशत पंजाब और किसान विरोधी हैं और भाजपा और अकालियों को छोड़ कर सभी राजनैतिक पार्टी भी इसी नुक्ते पर सहमति प्रकटा चुकी हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनको हाल ही में मिली सभी किसान जत्थेबंदियों ने भी इन आर्डीनैंसों को तुरंत रद्द करने की माँग की थी।

‘कैप्टन को सवाल ’ प्रोग्राम की अगली लड़ी के दौरान फेसबुक लाइव के ज़रिये सवाल का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने पहले भी पंजाबी राज्य लहर के द्वारा राज्य को बर्बाद कर दिया और अब इन आर्डीनैंसों की हिमायत करके किसानी को तबाह करने के लिए उतावले हुये फिरते हैं।

उन्होंने इन आर्डीनैंसों को मुल्क के संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया। इतिहास इस बात का गवाह है कि अकालियों ने पंजाब के टुकड़े किये और अपने संकुचित राजनैतिक हित पालने की ख़ातिर संकुचित नज़रिया अपनाते हुये राज्य के बहुत से साधन हिमाचल प्रदेश और हरियाणा को दे दिए।

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