जैन समाज की भावनाएं आहत करने वाले कथित बयान पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को ज्ञापन
Memorandum submitted to the Prime Minister
चंडीगढ़, 25 जून। भारतीय जनता पार्टी, चंडीगढ़ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जैन महासंघ चंडीगढ़ ट्राइसिटी के संयोजक कैलाश चंद जैन ने जैन मुनियों द्वारा प्रयोग की जाने वाली मयूर पंख पिच्छी के संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।
कैलाश चंद जैन ने इस विषय को गंभीर बताते हुए भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन की प्रतिलिपि श्रीमती मेनका गांधी को भी प्रेषित की गई है तथा उनसे अपने कथित बयान के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है।
कैलाश चंद जैन ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा एवं जीव-दया का संदेश देता है। जैन साधु-संत पिच्छी का उपयोग सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए करते हैं। पिच्छी प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मयूर पंखों से बनाई जाती है। ऐसे में मोरों की हत्या कर पिच्छी बनाए जाने का आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
उन्होंने कहा कि जैन संतों एवं जैन परंपराओं पर बिना किसी प्रमाण के इस प्रकार का गंभीर आरोप लगाना अत्यंत आपत्तिजनक है। यदि श्रीमती मेनका गांधी के पास अपने कथन के समर्थन में कोई विश्वसनीय प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। अन्यथा वे अपना बयान वापस लेकर जैन समाज एवं जैन मुनियों से सार्वजनिक क्षमा याचना करें।
कैलाश चंद जैन ने कहा कि जैन समाज एक शांतिप्रिय, राष्ट्रनिष्ठ एवं अहिंसक समुदाय है, जिसने सदैव सामाजिक समरसता, जीव-दया एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया है। किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक परंपराओं एवं आस्थाओं के संबंध में बिना प्रमाण इस प्रकार के वक्तव्य सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।
ज्ञापन में निम्न मांगें की गई हैं—
* मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए।
* कथित बयान के समर्थन में उपलब्ध प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा जाए।
* आरोप असत्य पाए जाने पर बयान वापस लेकर सार्वजनिक क्षमा याचना कराई जाए।
* भविष्य में ऐसी भ्रामक एवं तथ्यहीन टिप्पणियों पर रोक लगाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
कैलाश चंद जैन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना रखना नहीं है, बल्कि सत्य की स्थापना, जैन समाज की प्रतिष्ठा की रक्षा तथा सभी धर्मों एवं समुदायों के प्रति सम्मान की भावना को बनाए रखना है। उन्होंने केंद्र सरकार एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।