महाराष्ट्र के 59वें निरंकारी सन्त समागम का शुभारंभ भव्य शोभा यात्रा से आत्ममंथन से अपने अध्यात्मिक जीवन को महत्वपूर्ण बनाए
- By Vinod --
- Sunday, 25 Jan, 2026
59th Nirankari Sant Samagam of Maharashtra inaugurated with a grand procession
59th Nirankari Sant Samagam of Maharashtra inaugurated with a grand procession- चंडीगढ़/ पंचकूला/ सांगलीI महाराष्ट्र के 59वें निरंकारी सन्त समागम का शुभारंभ भव्य शोभा यात्रा से हुआ। सतगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सानिध्य में तीन दिवसीय समागम 24, 25 एवं 26 जनवरी 2026 को सांगली के सांगलवाडी के मैदान में आयोजित किया है।
मानवता के नाम संदेश देते हुए सतगुरू माता जी ने आग्रह किया कि यह प्रभु परमात्मा द्वारा दिए गए मानवीय जीवन को सुंदर बनाने के लिए, आत्ममंथन के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन को महत्वपूर्ण बनाना है।
सतगुरू माता जी ने उद्बोधन किया कि अपने कर्तव्यों के साथ जीवन में आत्ममंथन को शामिल करते हुए स्वयं सुधार करना है। जब हम खुद एक अच्छे इंसान बन जाएंगे और सेवा की भावना के साथ जीवनयापन करते हुए, संसार के कल्याण में सहभागी बनेंगे।
शोभा यात्रा: इसके पूर्व सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी का समागम स्थल पर आगमन होते ही समागम समिति के चेअरमन श्री शम्भुनाथ तिवारी ने सतगुरु माता जी का तथा समागम समिति के समन्वयक श्री नंदकुमार झांबरे ने समस्त साध संगत की ओर से आदरणीय निरंकारी राजपिता जी का फूलों के गुलदस्ते से हार्दिक स्वागत किया।
इसके उपरान्त दिव्य युगल समागम के मुख्य द्वार के ठीक सामने सांगली-ईश्वरपुर रोड के पास फूलों से सुशोभित पालकी में विराजमान हुए। हृदयसम्राट सतगुरु को अपने समीप पाकर लाखों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु आनंदविभोर हो रहे थे। इन श्रद्धालुओं ने ‘धन निरंकार’ के जयघोष से अपनी खुशी अभिव्यक्त की, जिससे संपूर्ण समागम स्थल गूँज उठा। दिव्य युगल की पालकी के सामने से पारंपारिक लोककला, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संदेश देने वाली झाँकियों को दर्शाती हुई रंग-बिरंगी भव्य शोभा यात्रा आगे बढ़ रही थी जिसमें महाराष्ट्र के साथ साथ देश के विभिन्न भागों से आये हुए कलाकार सामूहिक रूप से सम्मिलित थीं। कलात्मक रूप से श्रद्धालुओं द्वारा किए गए इस अभिवादन का सहर्ष स्वीकार करते हुए दिव्य युगल अपनी मुस्कुराहट से सभी को अपना आशीष प्रदान कर रहे थें।
शोभा यात्रा का आरंभ सेवादल बैण्ड से हुआ जिसके उपरान्त लेझिम, हलगी नृत्य, दक्षिण भारतीय प्रस्तुति, एकत्व का गुलदस्ता, विज्ञान एवं अध्यात्म, यक्षगान, सिंधी नृत्य, बंधन से आनंद तक, सहयोग एवं संतुलन, महिला लेझिम, मिशन का प्रकाशन एवं पत्रिकाएँ, पंजाबी नृत्य, नाशिक ढोल, मिशन की समाज कल्याण गतिविधियाँ तथा निरंकारी इन्स्टिट्यूट ऑफ म्युजिक एंड आर्टस् की झाँकी इत्यादि का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसे देखकर उपस्थित भक्तों ने करतल ध्वनी से अपनी खुशी का इजहार किया।