भाजपा में टिकट की देरी, मेयर सीट पर तरुण भंडारी के नाम पर फंसा पेंच

भाजपा में टिकट की देरी, मेयर सीट पर तरुण भंडारी के नाम पर फंसा पेंच

BJP ticket delays

BJP ticket delays, Tarun Bhandari's

अर्थ प्रकाश/आदित्य शर्मा/साजन शर्मा

पंचकूला। नगर निगम चुनाव की भागदौड़ के बीच भाजपा में पिछले तीन दिनों से मेयर और निकाय सदस्यों की टिकट फाइनल करने को लेकर चल रही उथल पुथल आज और तेज हो गई। कल तक हाइकमान के पास मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी के नाम की चर्चा चल रही थी लेकिन मंगलवार को समीकरण फिर से बदलना शुरू हो गए और भंडारी के नाम पर देररात तक पेंच फंसा रहा। एक तरफ जहां केंद्र में बैठे एक दिग्गज नेता ने तरुण भंडारी के नाम की सिराफिश की, वहीं राज्य के हाइकमान की भंडारी के नाम पर चुप्पी बनी रही। टिकट वितरण में हो रही देरी के पीछे यही एक मुख्य वजह बनी हुई है। हालांकि, भाजपा की तरफ से दावा कि गया था कि मंगलवार तक सभी रिक्तार्थियों के नाम की घोषणा हो जाएगी। सूत्रों से पता चला है कि दिल्ली में बीते दिन हुई बैठक में पांच नामों पर सहमति बनी, जिनमें श्यामा लाल बंसल, अमित जिंदल, तरुण भंडारी, दीपक शर्मा के अलावा पूर्व मेयर उपेंद्र कौर आहलूवालिया के नाम पर भी चर्चा हुई, लेकिन स्थानीय नेताओं का कहना था कि बाहरी उम्मीदवार क्यों, जब पार्टी के अंदर ही कई कद्दावर नेता मौजूद हैं। उधर, केंद्र में बैठे भाजपा के वरिष्ठ नेता तरुण भंडारी के नाम अडिग हैं, जिस कारण उम्मीदवार का नाम अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है। इधर, भाजपा के शीर्ष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अमित जिंदल, श्याम लाल बंसल, दीपक शर्मा और अन्य समर्थकों का दावा था कि बाहरी उम्मीदवार क्यों, स्थानीय नेता को ही प्राथमिकता दी जाए। सूत्रों से पता चला है कि हाइकमान उपेंद्र कौर आहलूवालिया को मैदान में उतारना चाहता है। इसके लिए केंद्र में एक अधिकारी ने आहलूवालिया के नाम की पैरवी की है। अब देखना होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा पंचकूला से किसी बनिया या पंजाबी को टिकट देने का मन बना चुकी है। 

खबरों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय और स्थानीय नेतृत्व लगातार बैठकों और फीडबैक के जरिए ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो न केवल पार्टी के भीतर स्वीकार्य हो, बल्कि पार्षदों के बीच भी समर्थन जुटाने में सक्षम हो। यही वजह है कि उम्मीदवार चयन में देरी हो रही है और हर पहलू को बारीकी से परखा जा रहा है।

 

इस बीच, एक और अहम राजनीतिक घटनाक्रम ने इस दौड़ को और दिलचस्प बना दिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कांग्रेस से जुड़े उपेंद्र अहलूवालिया भाजपा में शामिल होने की कोशिश में हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि उनकी एंट्री होती है, तो उन्हें मेयर पद की दौड़ में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

 

यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा मान रही है और किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचना चाहती है। पार्टी ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाना चाहती है जो राजनीतिक संतुलन साध सके और विपक्ष को कड़ी टक्कर दे सके।

 

वहीं, विपक्षी दल भी भाजपा की आंतरिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अंतिम उम्मीदवार के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके। फिलहाल, सभी रिपोर्ट्स और विश्लेषणों का निष्कर्ष यही है कि भाजपा के भीतर मेयर पद को लेकर गहन मंथन जारी है और स्थिति असमंजस में बनी हुई है। अब सबकी निगाहें पार्टी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आखिर इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भाजपा किस चेहरे को आगे करती है।