मंडी में भाजपा का शंखनाद: सुक्खू सरकार के खिलाफ 'आर-पार' की जंग का एलान, सड़कों पर उतरेगी 'भगवा सेना'
BJP Sounds the War Cry in Mandi
मंडी। BJP Sounds the War Cry in Mandi, हिमाचल प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक का समापन किसी सामान्य सांगठनिक चर्चा की तरह नहीं, बल्कि एक निर्णायक रणघोष के साथ हुआ। बैठक में पारित प्रस्तावों ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ वेट एंड वाच की नीति त्यागकर सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पार्टी ने एक ओर जहां केंद्र की मोदी सरकार के स्वर्णिम दशक के लिए उसकी पीठ थपथपाई, वहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आर-पार की लड़ाई का संकल्प लिया।
राष्ट्रीय राजनीतिक प्रस्ताव पेश
बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजनीतिक प्रस्ताव पेश करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत खाका खींचा। उन्होंने आंकड़ों की बाजीगरी के साथ बताया कि कैसे 2014 से 2026 के बीच भारत ने 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार और 12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी धाक जमाई है।
भाजपा नेताओं की मोदी सरकार को शाबाशी
भाजपा ने गौरव के साथ मोदी सरकार को इस बात के लिए शाबाशी दी कि उन्होंने आयुष्मान भारत के जरिए 70 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को सुरक्षा कवच दिया और बुनियादी ढांचे के विकास में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किए। कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में केंद्र की अंत्योदय नीति को भारत के उत्थान का आधार बताया।
प्रदेश सरकार पर तीखा प्रहार : भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का काला अध्याय
इसके उलट, प्रदेश की सुक्खू सरकार भाजपा के निशाने पर सबसे तीखे रूप में रही। प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन परमार,डा. राजीव भारद्वाज और प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने सरकार के कार्यकाल को हिमाचल के इतिहास का काला अध्याय करार दिया। भाजपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आते ही विकास का पहिया जाम कर दिया और प्रदेश को 1.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। 2000 से अधिक संस्थानों पर ताले जड़ने और हिमकेयर व सहारा जैसी संजीवनी योजनाओं का बजट रोकना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात बताया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार केंद्र से मिलने वाली सहायता का प्रभावी उपयोग करने में भी विफल रही है, जिससे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्य ठप पड़ गए हैं।
महासंग्राम का शंखनाद : सड़क से सदन तक घेराबंदी
कार्यसमिति के समापन सत्र में सबसे अहम रहा भाजपा का आंदोलनात्मक संकल्प। पार्टी के दिग्गज नेताओं ने एकजुट होकर ऐलान किया कि अब लड़ाई केवल विधानसभा के भीतर सीमित नहीं रहेगी। भाजपा ने सड़क से सदन तक संघर्ष का बिगुल फूंकते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में हर जिला और ब्लाक स्तर पर आंदोलन किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को चुनावी सिपाही बनकर घर-घर जाने का निर्देश दिया गया है।
कार्यसमिति की बैठक के साथ ही भाजपा ने 2027 के चुनावी महासंग्राम की तैयारी तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भाजपा का यह आक्रामक रुख प्रदेश की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है और सत्तारूढ़ कांग्रेस इसका जवाब कैसे देती है।