Sandeep Pathak FIR: पंजाब में 2 FIR दर्ज होने पर सामने आए संदीप पाठक; मीडिया से क्या कुछ कहा, जानें

पंजाब में 2 FIR दर्ज होने पर सामने आए संदीप पाठक; मीडिया से क्या कुछ कहा, फिर एक बार AAP से अलग होने की वजह बताई

BJP MP Sandeep Pathak Statement Over 2 FIRs Files in Punjab

BJP MP Sandeep Pathak Statement Over 2 FIRs Files in Punjab

Sandeep Pathak FIR News: पंजाब में अपने खिलाफ 2 FIR दर्ज होने को लेकर राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पहली बार मीडिया के सामने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। दरअसल एक दिन पहले ही ये जानकारी सामने आई थी कि संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब में गैर-जमानती धाराओं के तहत 2 FIR दर्ज की गई हैं। ये दोनों FIR पंजाब के 2 अलग-अलग ज़िलों में दर्ज हुई हैं। जिसके बाद पंजाब पुलिस एक्शन में है और कभी भी संदीप पाठक को गिरफ्तार कर सकती है।

मुझे जानकारी नहीं, मैं कल से इंतजार कर रहा

मीडिया को संबोधित करते हुए सांसद संदीप पाठक ने कहा, "कल से खबरें चल रही हैं कि मेरे खिलाफ पंजाब में 2 FIR दर्ज की गई हैं। जबकि मुझे अब तक इन FIR के बारे में कोई औपचारिक या अनौपचारिक सूचना नहीं है, मैं खुद कल से ही इंतजार कर रहा था की अगर FIR कॉपी मिले तो मैं कोई प्रतिक्रिया दूं। लेकिन अभी तक मुझे FIR के बारे में कोई जानकारी नहीं है।''

संभव है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग...

संदीप पाठक ने आगे कहा, ''संभव है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके अगर कोई FIR दर्ज की गई है तो उसके ऊपर मैं प्रतिक्रिया FIR देखने के बाद ही कर पाऊंगा। जितने भी लोग मुझे जानते हैं, जितने भी लोगों ने मेरे साथ काम किया है, उन सबको ये भली-भांति पता है कि मैं नीति व धर्म से चलने वाला व्यक्ति हूं।''

मैंने हमेशा नीति और धर्म पर ही काम किया

पाठक ने कहा, ''आम आदमी पार्टी में मैंने जब तक काम किया, नीति और धर्म पर ही काम किया। आज मैं भाजपा में हूं और मैं नीति और धर्म पर रहकर ही काम करूंगा। राजनीति में मेरे लिए सफलता और असफलता मायने नहीं रखती है. मुझे ये सुनिश्चित करना है कि मैं भले ही असफल हो जाऊं लेकिन अपने राजनीतिक धर्म को न तोड़ूं।''

फिर एक बार AAP से अलग होने की वजह बताई

वहीं संदीप पाठक ने कहा, ''आम आदमी पार्टी को मैंने व्यक्तिगत कारणों से नहीं छोड़ा है। ऐसा मैंने सैद्धांतिक और कार्यशैली में बहुत समय से चले आ रहे अंतर के कारण ऐसा किया। हमारा और उनका रास्ता अब अलग है। राजनीति में आना एक कठिन निर्णय है और इसीलिए लोग राजनीति में नहीं आते हैं। पर अब आ गए हैं तो मुझे विश्वास है कि मेरे जैसे साधारण व्यक्ति का ईश्वर साथ देगा।"

बीजेपी का आया था बयान

इससे पहले संदीप पाठक पर FIR दर्ज किए जाने को लेकर बीजेपी ने बड़ा बयान दिया था। बीजेपी ने कहा था कि ये कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सियासी बदलाखोरी है, ये आम आदमी पार्टी के दोहरे चरित्र को दिखाता है, कल तक जब संदीप आम आदमी पार्टी में थे तो ठीक थे, अब जब बीजेपी में आ गए तो आरोपी हो गए। हालांकि संदीप पाठक के खिलाफ दर्ज दोनों FIR में उनके खिलाफ कौन से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, इस बारे में बहुत ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आ पाई है।

पंजाब से राज्यसभा सांसद

ज्ञात रहे कि संदीप पाठक अप्रैल 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं, आम आदमी पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा था। संदीप पाठक आम आदमी पार्टी के एक प्रमुख रणनीतिकार माने जाते रहे हैं और उन्हें पार्टी का 'चाणक्य' कहा जाता था। कई चुनावों में आम आदमी पार्टी की जीत के पीछे संदीप पाठक का अहम रोल रहा। पाठक को आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का भी काफी करीबी माना जाता रहा। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें AAP के राष्ट्रीय संगठन महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई।

हाल ही में AAP छोड़कर BJP में आए

ज्ञात रहे कि राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने 24 अप्रैल को दिल्ली भाजपा कार्यालय राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करते हुए बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके अलावा आप के 4 और सांसद बीजेपी में शामिल हुए। राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, और संदीप कुमार पाठक के अलावा हरभजन सिंह, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता ने बीजेपी का दामन थामा था। इन सब में से पंजाब से 6 राज्यसभा सांसद हैं और 1 दिल्ली से।

नेता बनने से पहले शिक्षाविद थे संदीप पाठक

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से ताल्लुक रखने वाले संदीप पाठक का शैक्षणिक करियर बेहद उत्कृष्ट रहा है और वे राजनीति में आने से पहले शिक्षाविद थे। संदीप पाठक एक शिक्षाविद से राजनीतिज्ञ बने हैं। वे आईआईटी दिल्ली के पूर्व सहायक प्रोफेसर, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एमआईटी में पूर्व शोध सहयोगी रह चुके हैं। अरविंद केजरीवाल और पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़ते हुए चुनावी रणनीतियों की कमान संभाली थी. यानि राजनीति में कदम रखा था।