बिहार की आर्थिक स्थिति पर बढ़ा दबाव, बढ़ते कर्ज और सब्सिडी खर्च ने बढ़ाई चिंता
Bihar's economic situation is under increasing pressure,
पटना। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के आमद-खर्च से बिहार में राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती कुछ और बढ़ गई है। हिसाब-किताब लगभग पूरा हो गया है, लेकिन अभी थोड़ा-बहुत कमी-बेशी हो सकती है।
बजट अनुमान से सरकार को 1142 करोड़ अधिक की प्राप्ति हुई, लेकिन उसके लिए कर्ज दोगुना अधिक लिया गया। सब्सिडी में 21846.44 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो बजट प्रस्ताव से लगभग डेढ़ गुना अधिक रहा।
बहरहाल वित्त विभाग के स्तर पर बही-खाते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगर विभागों के स्तर पर कुछ बचे-बढ़े ब्योरा होंगे, तो उसे समायोजित कर संशोधित हिसाब-किताब भी जारी हो सकता है, अन्यथा पिछले वित्तीय वर्ष में खजाने में 295217.15 करोड़ रुपये आए।
बजट प्रस्ताव की तुलना मेंं यह आमद 0.39 प्रतिशत अधिक रही। हालांकि, इस आमद में राजस्व प्राप्तियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं, लेकिन पूंजीगत प्राप्तियों के जरिये सरकार ने पर्याप्त धन जुटा लिया। पूंजीगत प्राप्तियों में कर्ज और उधारी से वसूली आदि आते हैं। राजस्व प्राप्तियों में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी-अनुदान, जीएसएटी, बिक्री-कर आदि होते हैं।
दरअसल, प्रतिबद्ध व्यय (वेतन-पेंश्न, ब्याज अदायगी) के साथ चुनावी वादों (पिंक बस-टायलेट, दस हजारी योजना आदि) को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कर्ज लेने की नौबत आई।
इसके कारण राजकोषीय घाटा के बढ़कर दहाई अंक में पहुंच जाने का अनुमान है, जो खजाने की सेहत के लिए अच्छी स्थिति नहीं। इस घाटे की यथाशीघ्र भरपाई नहीं होने पर ब्याज अदायगी का दबाव बढ़ता जाएगा।
अभी कुल राजस्व प्राप्तियों की नौ प्रतिशत से अधिक राशि ब्याज में जा रही है। कुल देनदारी चार लाख करोड़ से अधिक की बन चुकी है। ऐसे में अगर कर्ज लेने की प्रवृत्ति पिछले वित्तीय वर्ष की तरह ही रही तो यह निर्धारित अधिकतम सीमा को पार कर जाएगी।
उल्लेखनीय है कि बिहार पर कर्ज और दूसरी तरह की देनदारी की मात्रा मार्च, 2025 में जीएसडीपी के 38 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी।
15वें वित्त आयोग के मानक पर इसके 39.90 प्रतिशत से अधिक होने पर खजाने की गति बेपटरी मानी जाएगी। चालू वित्तीय वर्ष में सरकार की मंशा 61939.48 करोड़ रुपये कर्ज लेने की है।
वेतन पर अधिक, पेंशन में कम
बजट अनुमान से वेतन पर लगभग तीन प्रतिशत अधिक राशि खर्च हुई और पेंशन में लगभग 13 प्रतिशत कम। 33389.43 करोड़ रुपये पेंशन में खर्च का अनुमान था। खर्च हुए 20923.18 करोड़। वेतन में बजट अनुमान 55953.23 करोड़ की तुलना में व्यय 57630.33 करोड़ रहा।
सब्सिडी में बेतहाशा वृद्धि
सब्सिडी में अनुमान की तुलना में खर्च 64 प्रतिशत अधिक रहा। 13295.30 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के बजाय वास्तविक व्यय 21846.44 करोड़ रहा। अधिसंख्य राशि बिजली मद में गई।
सब्सिडी पर व्यय में वृद्धि की प्रवृत्ति लगातार दूसरे वर्ष रही। 2024-25 में अनुमान से 43 प्रतिशत अधिक राशि सब्सिडी पर खर्च हुई थी।
2025-26 में बिहार की कमाई
| शीर्ष | बजट अनुमान | वास्तविक | प्रतिशत में |
|---|---|---|---|
| कुल प्राप्ति | 294075.15 | 295217.15 | 100.39 |
| राजस्व प्राप्तियां | 260831.44 | 215943.18 | 82.79 |
| पूंजीगत प्राप्तियां | 32243.71 | 79273.98 | 238.46 |
(नोट : बजट अनुमान और वास्तविक राशि करोड़ रुपये में, वास्तविक व्यय मार्च, 2026 तक)