सरायरंजन बचाओ पद यात्रा का हुआ सार्थक समापन

Sarairanjan Bachao Pad Yatra concluded meaningfully

Sarairanjan Bachao Pad Yatra concluded meaningfully

500 किलोमीटर की यात्रा बनी जनता की आवाज

मुकेश कुमार सिंह

पटना (बिहार) : Sarairanjan Bachao Pad Yatra concluded meaningfully: बीते 25 अप्रैल से समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई "सरायरंजन बचाओ पदयात्रा" का मंगलवार को समापन हो गया। बताना लाजिमी है कि द्वितीय चरण की यह 500 किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्रा, पूरी तरह से जनता की प्रखर और मुखर आवाज बन चुकी है। जाहिर तौर पर बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, राजनीतिक हलचलें वैसे-वैसे तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में युवा नेता कुणाल कुमार के द्वारा शुरू की गई "सरायरंजन बचाओ यात्रा" ने, जन-जागरण की एक नई मिसाल कायम की है। इस यात्रा के द्वितीय चरण का मंगलवार को 12 वाँ दिन था, जिसमें कुणाल कुमार ने सरायरंजन प्रखंड के बरबट्टा, रुपौली बुजुर्ग, मुसरीघराड़ी चौक होते हुए सरायरंजन बाजार के रास्ते नरघोघी तक पैदल यात्रा की और आमजन से संवाद स्थापित किया। इस जनसंपर्क अभियान का समापन अत्यंत भव्य तरीके से और बेहद उत्साह से किया गया। इस महायात्रा में ना केवल सरायरंजन के लोग बल्कि आस-पास के विधानसभा क्षेत्र के लोग भी शामिल हुए।

Sarairanjan Bachao Pad Yatra concluded meaningfully

बड़ी संख्या में लोगों की हुई भागीदारी ने, इस बात का गहरा संकेत दिया है कि वे वर्तमान शासन से असंतुष्ट हैं और कुणाल कुमार में एक नई उम्मीद देख रहे हैं। गौरतलब है कि यह यात्रा दो चरणों में पूरी की गई। पहला चरण 22 मार्च को विद्यापतिनगर प्रखंड से प्रारंभ हुआ था, जबकि दूसरा चरण 25 अप्रैल से सरायरंजन प्रखंड से आरंभ हुआ। कुणाल कुमार प्रतिदिन औसतन 20 किमी पैदल चलते हुए अपने गृह पंचायत बढ़ोना तक पहुँचे। इस 12 दिवसीय पदयात्रा के दौरान कुणाल कुमार ने अपने हजारों समर्थकों के साथ लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा तय की। यात्रा के दौरान उन्होंने हमसे हुई बातचीत के दौरान बताया कि क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में झखड़ा-पूरनिया एक्सप्रेसवे का अधूरापन, मेडिकल कॉलेज के बाद भी गुणवत्तापूर्ण इलाज की कमी, डोमिसाइल नीति में विसंगति, इंदिरा आवास योजना में धांधली, स्मार्ट मीटर विवाद, सूखती नदियाँ, नल-जल योजना की विफलता और विधायक के इर्द-गिर्द सक्रिय दलालों की मनमानी को वे अपनी आगामी चुनावी नीति में प्राथमिकता देंगे। उन्हें इन तमाम समस्याओं से जनता को निजात दिलाना है और एक बेहतरीन सरायरंजन जनता को सौंपना है।

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क्षेत्रवासी लगातार कह रहे हैं कि वे हर बार दोहरे वादों के जाल में फँसते रहे हैं, जिससे आत्मनिर्भरता की राह बंद हो गयी है । क्षेत्रीय लोग गरीबी की ओर धकेल दिए गए हैं। इस पदयात्रा ने जनमानस में एक नई ऊर्जा और विश्वास का संचार किया है। क्षेत्रवासी आगामी विधानसभा चुनाव में कुणाल कुमार को पूर्ण समर्थन देने का वादा कर रहे हैं और उन्हें एक मजबूत जनप्रतिनिधि के रूप में देखना चाहते हैं। मोटे तौर पर हम यह जरूर कहना चाहेंगे कि यह जनयात्रा जनआस्था का वह संकल्प है, जो बदलाव की नई दस्तक दे रही है।