पंचकूला AJL प्लॉट केस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने आरोप तय करने का आदेश किया रद्द
- By Gaurav --
- Thursday, 26 Feb, 2026
Bhupinder Singh Hooda gets major relief in Panchkul
पंचकूला में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda को बड़ी राहत मिली है। Punjab and Haryana High Court ने बुधवार को आरोप तय किए जाने के खिलाफ दायर याचिका स्वीकार करते हुए स्पेशल CBI कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध नहीं होते, इसलिए आरोप तय करने के आदेश को खारिज किया जाता है।
क्या था मामला?
यह केस पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर सरकारी भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। आरोप था कि यह प्लॉट Associated Journals Limited (AJL) को कथित तौर पर कम कीमत पर दोबारा आवंटित किया गया।
सीबीआई ने हुड्डा समेत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP/पूर्व HUDA) के चार वरिष्ठ अधिकारियों को भी आरोपी बनाया था। आरोप के मुताबिक, लगभग 64.93 करोड़ रुपये मूल्य का प्लॉट 69 लाख 39 हजार रुपये में आवंटित किया गया।
हाईकोर्ट का क्या फैसला रहा?
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CBI स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द किया गया।
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कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य के बिना मुकदमा चलाना उचित नहीं।
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आपराधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
इस फैसले के बाद फिलहाल हुड्डा और अन्य आरोपियों को राहत मिल गई है।
केस की टाइमलाइन समझिए
1️⃣ 1982 – पहली बार आवंटन
भजनलाल सरकार के दौरान AJL को पंचकूला में अखबार शुरू करने के लिए जमीन आवंटित की गई। उस समय कांग्रेस सरकार थी और मोतीलाल बोरा AJL के चेयरमैन थे।
2️⃣ 1992 – प्लॉट रिज्यूम
सरकार ने यह कहते हुए जमीन वापस ले ली कि निर्धारित समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। AJL ने इस आदेश को चुनौती दी।
3️⃣ 2005 – दोबारा आवंटन
कांग्रेस सरकार की वापसी के बाद हुड्डा के कार्यकाल में प्लॉट दोबारा आवंटित किया गया। यहीं से विवाद ने राजनीतिक और कानूनी रूप लिया।
4️⃣ 2016 – विजिलेंस FIR
भाजपा सरकार के कार्यकाल में हरियाणा विजिलेंस ने 5 मई 2016 को FIR दर्ज की।
5️⃣ 2017 – CBI जांच
4 अप्रैल 2017 को जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी गई। 27 जनवरी 2017 को CBI ने केस दर्ज किया और 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दायर की।
6️⃣ 2021–2025 – स्टे
हाईकोर्ट ने कई वर्षों तक सुनवाई पर रोक (स्टे) लगाए रखी।
अब ताजा फैसले में आरोप तय करने का आदेश रद्द कर दिया गया है।
राजनीतिक और कानूनी असर
यह फैसला हरियाणा की राजनीति में अहम माना जा रहा है। हुड्डा के समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया, जबकि विरोधी दल इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं।
फिलहाल, हाईकोर्ट के इस आदेश से CBI कोर्ट की कार्रवाई पर बड़ा असर पड़ा है। आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।