अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ बहस पर राज्य सरकार को घेरा

अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ बहस पर राज्य सरकार को घेरा

Ashok Gehlot cornered the state government

Ashok Gehlot cornered the state government

जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ की चर्चा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने इस तरह की बहस नहीं की। गहलोत ने कहा कि आजादी के बाद से किसी भी सरकार ने ऐसा मूर्खतापूर्ण बयान नहीं दिया होगा। उन्होंने कहा कि यह बेहद बेतुका बयान था, इसलिए सरकार को इसे वापस लेना पड़ा। गहलोत ने यह भी कहा कि न तो केंद्र में और न ही किसी राज्य में कभी ‘दो साल बनाम पांच साल’ जैसी चर्चा हुई है।
 
पहले सरकार ने इस पर सहमति जताई, फिर कहा कि वह प्रतिवेदन पर चर्चा करेगी। गहलोत ने इसे बेतुका बताते हुए कहा कि भाजपा के दो साल के कार्यकाल की वास्तविक स्थिति पर खुली चर्चा होनी चाहिए और मुख्यमंत्री को जनता से फीडबैक लेना चाहिए।विज्ञापन
 
गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जिन विकास कार्यों का श्रेय ले रही है, उनमें से कई योजनाएं उनकी सरकार के समय स्वीकृत और शुरू की गई थीं। वित्तीय स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया और प्रारंभिक कार्य पहले ही हो चुके थे। उन्होंने कहा कि कुछ योजनाएं बंद कर दी गईं, जबकि कई तैयार परियोजनाएं शुरू नहीं की जा रहीं, जिससे जनता और युवाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा।
 
प्रधानमंत्री और लोकतंत्र पर टिप्पणी
गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विपक्ष मुक्त भारत’ वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सशक्त विपक्ष जरूरी होता है और बिना विपक्ष के सत्ता का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं और स्वस्थ परंपराओं को कमजोर किया जा रहा है।
 
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी पर भी गहलोत ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान माहौल को खराब करते हैं और लोकतांत्रिक संवाद को नुकसान पहुंचाते हैं।
 
गृह विभाग की अनुदान मांगों पर आपत्ति
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि पक्ष और विपक्ष के सुझावों से बेहतर प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकें। गहलोत ने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुशासन के मुद्दों पर खुली बहस आवश्यक है।

मंत्री बेढम ने दिया गहलोत को जवाब
वहीं, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम बोले कि सदन में पहली बार प्रदेश के सीएम ने यह वक्तव्य दिया कि पांच साल में आप जो नहीं कर पाए, वह हमने दो साल में कर दिया। इस बयान से कांग्रेस की चूलें हिल गईं।

बेढम ने आगे कहा कि कांग्रेस के नेताओं को दिल्ली से फटकार पड़ी। उनसे कहा गया कि आप सदन में बोले क्यों नहीं। आप सदन में कर क्या रहे थे। आपने सदन में हो-हल्ला किया क्यों। फटकार लगी तो कई सीनियर लोग आज सदन में आए। यह उनकी अंदरूनी लड़ाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को कहा गया कि नेता प्रतिपक्ष को क्यों नहीं बोलने दिया जाता। बेढम बोले कि इसके बाद भी नेता प्रतिपक्ष को फिर नहीं बोलने दिया गया। राजस्थान में यह संदेश दिया गया कि कांग्रेस दलित विरोधी है।