दोस्ती की मिसाल, मौत भी जुदा न कर सकी: महेंद्रगढ़ हाईवे हादसे में विजयनगर के दोनों दोस्तों की एक साथ मौत, उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार
An example of friendship that even death could not sever
नारनौल। An example of friendship that even death could not sever, कहते हैं दोस्ती केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि सुख-दुख और संघर्षों में एक-दूसरे का सहारा बनने का रिश्ता है। जिले के अटेली क्षेत्र से सटे राजस्थान के विजयनगर गांव के रहने वाले सोमबीर राजपूत और दिलखुश की दोस्ती भी ऐसी ही थी।
दोनों साथ काम करते थे, साथ सफर करते थे और रोजी-रोटी की तलाश में एक ही बस में सफर तय करते थे। लेकिन शुक्रवार सुबह महेंद्रगढ़ के बुचावास के पास 152 डी पर हुए हादसे ने दोनों दोस्तों को एक साथ निगल लिया। अब गांव में उनके नाम एक साथ लिए जा रहे हैं, लेकिन उन आवाजों में अपनापन नहीं, केवल दर्द और सिसकियां हैं।

एक ही बस में साथ काम करते थे दोनों दोस्त
मनाली से जयपुर लौट रही बस में चालक की सीट पर सोमबीर थे, जबकि 22 वर्षीय दिलखुश सहयोगी चालक के रूप में उनके साथ था। दोनों एक-दूसरे के भरोसेमंद साथी थे। लंबे सफर, थकान और जिम्मेदारियों के बीच दोनों ने वर्षों तक साथ काम किया। हादसे की खबर जैसे ही विजयनगर पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिन दो दोस्तों को हमेशा साथ देखा, वे दुनिया से भी साथ ही विदा हो गए।
छह माह की उम्र में पिता को खो दिया था सोमबीर ने
सोमबीर की जिंदगी संघर्षों की लंबी कहानी रही। वह केवल छह माह के थे, जब उनके पिता रतन सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद मां ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए उन्होंने कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया और पिछले करीब 15 वर्षों से बस चला रहे थे।
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स्वजनों के अनुसार चार वर्ष पहले उनका विवाह हुआ था। उनके दो छोटे बेटे हैं, जिनमें एक की उम्र तीन वर्ष और दूसरा डेढ़ वर्ष का है। बुजुर्ग मां का सहारा भी वही थे। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अक्सर घर से दूर रहते थे और 10-15 दिन में एक बार ही घर आ पाते थे।
बुधवार को घर से निकले, फिर कभी लौटकर नहीं आए
सोमबीर के चाचा के अनुसार सोमबीर बुधवार को ही घर से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। घर से निकलते समय उन्होंने बच्चों को दुलार किया, मां का हालचाल पूछा और काम पर लौट गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह परिवार के साथ उनकी आखिरी मुलाकात होगी। अब घर के आंगन में खेल रहे दोनों मासूम बेटों को यह भी नहीं पता कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
दिलखुश के साथ ही टूट गए परिवार के सपने
महज 22 वर्षीय दिलखुश के सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। परिवार को बेहतर भविष्य देने और जिम्मेदारियां निभाने के लिए वह मेहनत कर रहा था। गांव के लोग बताते हैं कि दिलखुश और सोमबीर का रिश्ता केवल चालक और सहयोगी चालक का नहीं था, बल्कि दोनों गहरे दोस्त थे। एक की ड्यूटी होती तो दूसरा साथ रहता। दोनों परिवारों के बीच भी आत्मीय संबंध थे।
जब हाईवे पर मच गई चीख-पुकार
घटना के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंची 112 टीम के इंचार्ज युद्धवीर सिंह के अनुसार हादसे का दृश्य बेहद भयावह था। ट्रक में लोहे की एंगल भरी हुई थीं और टक्कर के बाद वे बस के अगले हिस्से को चीरते हुए अंदर तक घुस गईं। चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। कुछ यात्री शीशे तोड़कर बाहर निकल चुके थे, जबकि कई अंदर फंसे हुए थे।

राहत एवं बचाव दल, फायर कर्मियों, पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर घायलों को बाहर निकाला। कई यात्री डरे-सहमे हुए थे और अपनों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। बचाव अभियान के दौरान एक फायर कर्मी भी घायल हो गया।
गांव में पसरा सन्नाटा, हर आंख नम
विजयनगर गांव में शुक्रवार का दिन मातम में डूबा रहा। जिन घरों में रोजमर्रा की चहल-पहल रहती थी, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। स्वजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि हादसे में केवल दो लोगों की जान नहीं गई, बल्कि दो परिवारों की उम्मीदें, सपने और सहारे भी एक साथ टूट गए।