तेजस्वी यादव की बिहार वापसी के बाद छात्र आंदोलन को मिला सियासी समर्थन, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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Student movement gains political support following Tejashwi Yadav's return to Bihar

Student movement gains political support following Tejashwi Yadav's return to Bihar, करीब एक हफ्ते बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिहार लौट आए हैं. लौटते ही उन्होंने छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए, तो राष्ट्रीय जनता दल पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन करेगा. इसके साथ ही छात्र संगठन आइसा ने भी साफ कर दिया है कि अगर छात्रों को नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. इससे साफ है कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी बिहार का छात्र आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. 

बिहार में पिछले कुछ दिनों से छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में रहा. शुरुआत छात्रों की मांगों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे आंदोलन पटना से निकलकर कई जिलों तक पहुंच गया. जहानाबाद, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीवान, छपरा, बेगूसराय, कटिहार और दूसरे जिलों में भी छात्र सड़कों पर उतरे. कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. पथराव, लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं हुईं. सिवान में तो पुलिस ने छात्रो पे AK 47 से फायरिंग कर दी, जिससे ये मामला और  जायदा गड़बड़ा गया. कई ज‍िलों में छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उन पर मामले दर्ज किए गए। इसी दौरान तेजस्वी यादव विदेश यात्रा पर थे। इसे लेकर भाजपा ने उन पर लगातार निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कहा कि जब बिहार के छात्र आंदोलन कर रहे थे, तब नेता प्रतिपक्ष राज्य से बाहर थे। अब बिहार लौटने के बाद तेजस्वी ने आंदोलन को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. 

पूरे ब‍िहार में आंदोलन की चेतावनी 

तेजस्वी यादव ने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो उनकी पार्टी पूरे बिहार में आंदोलन करेगी. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि अब लोगों का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नहीं रहा है. किसानों के बाद अब छात्रों के साथ भी अन्याय हो रहा है. उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाना बहुत गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि देश में पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं, लेकिन छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया गया. 

'छात्रों पर गोली चलाना ठीक नहीं है' 

तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल ज्यादातर छात्र 16 से 17 साल के थे. वे सिर्फ अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे. ऐसे छात्रों पर बल प्रयोग करना और गोली चलाना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि सिर्फ एक पुलिसकर्मी को हटाने से मामला खत्म नहीं हो जाता. उन्होंने सवाल उठाया कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया? इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है? क्या इस मामले में एसपी, गृह मंत्री या दूसरे अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी? उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.

आइसा ने भी सरकार को दी चेतावनी

दूसरी ओर, आइसा ने भी सरकार को चेतावनी दी है. संगठन का कहना है कि जब तक गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए जाएंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव की वापसी के बाद छात्र आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन मिल सकता है. अब तक आंदोलन की अगुवाई छात्र संगठन कर रहे थे, लेकिन अब सबसे बड़ा विपक्षी दल भी खुलकर उनके साथ खड़ा दिख रहा है. इससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है. 

बिहार की राजनीति का मुद्दा भी बदला

इस पूरे आंदोलन ने बिहार की राजनीति का मुद्दा भी बदल दिया है. अब सिर्फ जाति और चुनाव की नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य की भी चर्चा हो रही है. यही वजह है कि लगभग सभी राजनीतिक दल अब छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं. तेजस्वी यादव की वापसी, उनका आंदोलन का ऐलान और आइसा की चेतावनी से यह मुद्दा फिर गरमा गया है. अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है. अगर गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए, तो आने वाले दिनों में बिहार में छात्र आंदोलन फिर जोर पकड़ सकता है.