पंजाब सरकार द्वारा FIR डाउनलोड पर शुल्क के खिलाफ एडवोकेट वासु शांडिल्य व अभिषेक मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में दायर की जनहित याचिका
Advocates Vasu Shandilya and Abhishek Malhotra
चंडीगढ़: Advocates Vasu Shandilya and Abhishek Malhotra, न्याय तक पहुंच और पारदर्शिता से जुड़े एक महत्वपूर्ण कदम के तहत काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य एवं नेशनल कोऑर्डिनेटर एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226/227 के अंतर्गत जनहित याचिका दायर की है।
इस याचिका में पंजाब सरकार की उस नीति को चुनौती दी गई है, जिसके तहत पंजाब पुलिस सांझ पोर्टल से FIR, डेली डायरी रिपोर्ट और लॉस्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट डाउनलोड करने पर शुल्क लिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नीति आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है और इसका कोई वैधानिक आधार नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार शुल्क लगाना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(2) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें एफआईआर की प्रति नि:शुल्क प्रदान करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त यह पंजाब पुलिस नियम, 1934 के नियम 24.5 के भी विरुद्ध है, जो एफआईआर की कॉपी बिना किसी शुल्क के देने की व्यवस्था करता है।
एडवोकेट शांडिल्य एवं मल्होत्रा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें एफआईआर की मुफ्त और आसान उपलब्धता पर जोर दिया गया था ताकि आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि एफआईआर तक पहुंच के लिए शुल्क लेना आम जनता के लिए एक अनुचित बाधा है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह अनुच्छेद 39-ए की भावना के भी विपरीत है, जो समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित करता है, तथा मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 का भी उल्लंघन है।
याचिका में इस नीति को रद्द करने, FIR एवं DDR की मुफ्त डिजिटल पहुंच बहाल करने और याचिकाकर्ता से अवैध रूप से वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त, अंतरिम राहत के रूप में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि अंतिम निर्णय तक इस नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए और पोर्टल से एफआईआर एवं डीडीआर की मुफ्त डाउनलोडिंग की अनुमति दी जाए।
यह मामला नागरिकों के सूचना के अधिकार और न्याय तक पहुंच से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। इस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है और इसका निर्णय पंजाब में पुलिस रिकॉर्ड्स तक सार्वजनिक पहुंच पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।