उत्तराखंड कांग्रेस में 'खिचड़ी': पुराने दुश्मन अब बने 'साथी', हरदा की नाराजगी और ठुकराल के वीडियो ने बढ़ाई बेचैनी

उत्तराखंड कांग्रेस में 'खिचड़ी': पुराने दुश्मन अब बने 'साथी', हरदा की नाराजगी और ठुकराल के वीडियो ने बढ़ाई बेचैनी

A Mishmash in Uttarakhand Congress

A 'Mishmash' in Uttarakhand Congress

देहरादून। A 'Mishmash' in Uttarakhand Congress, उत्तराखंड में राजनीतिक वनवास झेल रही कांग्रेस ने तीन पूर्व विधायकों को अपने पाले में भले ही खींच लिया हो, लेकिन पुराने रिश्तों और बदले समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। कभी समर्थन, कभी विरोध के बीच अब सवाल भी उठ रहे हैं कि राजनीतिक खिचड़ी कैसे पकेगी।

विशेषकर, पूर्व विधायक भीमलाल आर्य की कांग्रेस में वापसी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ उनके संबंधों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सभी की जुबां पर यही बात है कि हरदा क्या आर्य के साथ पुरानी कड़वाहट को भुला पाएंगे।

यही नहीं, कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का भाजपा में रहने के दौरान रुद्रपुर में हुई जनसभा का एक पुराना वीडियाे भी इंटरनेट मीडिया में तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वह गांधी परिवार के खिलाफ विषवमन कर रहे हैं।

आर्य ने रावत के खिलाफ खोला था मोर्चा

पहले बात पूर्व विधायक भीमलाल आर्य की। हरीश रावत सरकार के समय वर्ष 2016 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान आर्य ने भाजपा से बगावत कर हरीश रावत सरकार का खुलकर समर्थन किया था और अपनी विधायकी तक दांव पर लगाने की बात कही थी। उस समय दोनों नेताओं के बीच नजदीकी साफ नजर आई थी। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद समीकरण बदले और आर्य ने रावत के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।

अगस्त 2016 में उन्होंने अपने क्षेत्र घनसाली की मांगों को लेकर रावत के आवास के बाहर धरना तक दिया और उन्हें विकास का कातिल तक कह दिया था। इससे आर्य और हरदा के रिश्तों में गहरी तल्खी ला दी थी।

अब ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में आर्य की कांग्रेस में वापसी ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हरदा पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आर्य को स्वीकार करते हैं या फिर यह मुद्दा अंदरूनी खींचतान को जन्म देगा।

अपने करीबी को पार्टी में शामिल करना चाहते थे रावत

चर्चा यह भी है कि हरीश रावत अपने एक करीबी को पार्टी में शामिल करना चाहते थे, लेकिन प्रदेश स्तर के नेताओं के बीच सहमति नहीं बनी। बताया जा रहा है कि हरीश रावत इससे खुश नहीं है। राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी को इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

इंटरनेट मीडिया में चर्चा

वहीं, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी इंटरनेट मीडिया में चर्चा के केंद्र में हैं। एक दौर में वह कांग्रेस और गांधी परिवार पर सियासी हमले बोलने में पीछे नहीं रहे हैं। इन सब परिस्थितियों में कभी तल्ख टिप्पणी और कभी विरोध करने वाले नेता अब कांग्रेस में किस तरह से तालमेल बैठा पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।