आंगनबाड़ी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम

आंगनबाड़ी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम

A major step towards digitizing the Anganwadi

A major step towards digitizing the Anganwadi

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व मुख्य सेविकाओं को दिए 69,800 स्मार्टफोन

754 कार्यकर्ताओं व सहायिकताओं को मिले नियुक्ति पत्र, ''सुपोषित भारत’ मिशन पर जोर

450 करोड़ रुपये की लागत आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का हुआ लोकार्पण व शिलान्यास

लखनऊ। A major step towards digitizing the Anganwadi, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन व नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि अब आंगनबाड़ी केंद्र “डिजिटल सेवा केंद्र” के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं काे स्मार्ट फोन देते हुए कहा कि इनका मानदेय भी “स्मार्ट” होना चाहिए। इसे जल्द “सम्मानजनक” किया जाएगा और पूरी व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर पारदर्शी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा...“सम्मानजनक” मतलब न्यूनतम मानदेय की गारंटी मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अप्रैल से आउटसोर्स कर्मियों के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसमें न्यूनतम वेतन की गारंटी होगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त की जाएगी।

लाेक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन देने से अब रियल टाइम डाटा अपलोड होगा और राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की रैंकिंग बेहतर होगी। उन्होंने बताया कि 46 जिलों में 754 नवचयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में अन्य चयन प्रक्रियाएं भी जारी हैं। इस वर्ष पांच हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व 60 हजार से अधिक सहायिकाओं की नियुक्ति का लक्ष्य हमने अभी से दे दिया है। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन की डिजाइन का भी विमोचन किया।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी शिक्षा संचालित की जा रही है। इसके तहत 27 हजार केंद्रों को आंगनबाड़ी व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण एक ही मंच पर सुनिश्चित होगा। ‘सुपोषित भारत’ को देश के भविष्य की बुनियाद बताते हुए कहा कि यह अभियान सिर्फ पोषण नहीं, बल्कि “सशक्त और साक्षर भारत” की नींव तैयार करने का मिशन है।

अगर नवजात शिशु सुपोषित होगा और मां स्वस्थ होगी, तो देश को सशक्त बनने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन यदि बचपन कुपोषित रहा और माताएं अस्वस्थ रहीं, तो राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है। कार्यक्रम में 702 आंगनबाड़ी केंद्रों और 71 बाल विकास परियोजना कार्यालयों का शिलान्यास तथा 2,468 केंद्रों और 69 परियोजना कार्यालयों का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही ग्रोथ मानिटरिंग के लिए स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर और वेट मशीन जैसे उपकरण भी वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता “यशोदा मैया” की भूमिका निभा रही हैं, जो देश के भविष्य को गढ़ने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 35 लाख बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक गर्म भोजन दिया जा रहा है और कुपोषण के खिलाफ बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले पोषाहार वितरण में माफियाओं का दखल था, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती थी, जबकि अब पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है और इसमें न सिफारिश चलती है, न पैसे का लेन-देन।

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे तकनीक का अधिकतम उपयोग करें और “स्मार्ट आंगनबाड़ी” के लक्ष्य को जमीन पर उतारें, ताकि सुपोषित, साक्षर और सशक्त भारत का निर्माण किया जा सके। कार्यक्रम में महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, एमएलसी मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, लाल जी प्रसाद निर्मल, विधायक डा. नीरज बोरा, अमरेश कुमा, जय देवी, योगेश शुक्ल आदि उपस्थित थे।

कुपोषण व बौनापन पहले से घटा

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में चलाए गए अभियानों के तहत बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। लगभग 1.70 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई है। डेढ़ लाख कुपोषित बच्चों में से 80 प्रतिशत से अधिक को सुपोषित श्रेणी में लाया गया है। बौनापन दर 48 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत तक आ गई है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस मिशन का “मुख्य आधार” बताते हुए कहा कि वही जमीनी स्तर पर इस अभियान को सफल बना रही हैं।

 

कार्यक्रम में खास

69,804 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व मुख्य सेविकाओं को मिले सैमसंग के स्मार्ट फोन
दो लाख ग्रोथ मानिटरिंग उपकरण का वितरण
754 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र
450 करोड़ रुपये की लागत से 3170 आंगनबाड़ी केंद्रों व 140 परियोजना कार्यालय का लोकार्पण-शिलान्यास