एम-पैक्स अभियान से 54 लाख किसान जुड़े, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार

एम-पैक्स अभियान से 54 लाख किसान जुड़े, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार

54 lakh farmers join M-PACS campaign

54 lakh farmers join M-PACS campaign

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सहकार से समृद्धि' विजन के अभूतपूर्व परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा चलाए गए एम-पैक्स (M-PACS) सदस्यता महाअभियान के जरिए प्रदेश के करीब 54 लाख किसान सहकारी ढांचे से जुड़कर सीधे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। यह अभियान न केवल छोटे किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करा रहा है, बल्कि उन्हें सस्ती दर पर फसली ऋण, उन्नत बीज और उर्वरक उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रहा है। 

सहकारी बैंकिंग का नया दौर: ₹660 करोड़ की पूंजी से मजबूत हुआ ग्रामीण ढांचा

योगी सरकार के इस विशेष अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग के प्रति विश्वास को बढ़ाया है। जिला सहकारी बैंकों में 2 लाख से अधिक नए खाते खोले गए हैं, जिनमें अब तक 550 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा हो चुकी है। सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से 110 करोड़ रुपये की अंश पूंजी भी जुटाई गई है, जिससे सहकारी तंत्र में कुल 660 करोड़ रुपये का निवेश प्रवाहित हुआ है। इस वित्तीय मजबूती का सीधा लाभ उन सीमांत किसानों को मिल रहा है जिन्हें पहले ऋण के लिए साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था।

डिजिटल क्रांति: क्यूआर कोड और यूपीआई से खाद-बीज का वितरण पारदर्शी

सहकारी समितियों (M-PACS) को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। अब पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है:

  • पारदर्शी भुगतान: खाद और उर्वरक वितरण के लिए क्यूआर कोड और यूपीआई (UPI) आधारित कैशलेस व्यवस्था लागू की गई है।

  • द्वार पर सेवा: मोबाइल आधारित पंजीकरण पोर्टल की वजह से ग्रामीणों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि घर के पास ही सदस्यता और अन्य सेवाएं मिल रही हैं।

  • समयबद्ध अभियान: सितंबर 2023 में शुरू हुए पहले चरण और सितंबर 2025 में दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन ने इस अभियान को देश का सबसे बड़ा सहकारी सदस्यता अभियान बना दिया है।

छोटे किसानों के लिए 'सुरक्षा कवच' बनी एम-पैक्स

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता ग्रामीण आबादी को औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ना रही है। एम-पैक्स के जरिए मिलने वाला सस्ता फसली ऋण किसानों की लागत घटाने में गेम-चेंजर साबित हुआ है। सहकारी समितियों के इस सुदृढ़ीकरण से न केवल खेती का उत्पादन बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। 'सहकार से समृद्धि' का यह मॉडल अब उत्तर प्रदेश के गांवों में खुशहाली का नया आधार बन रहा है।