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भगवा कपड़ों में 2 मुस्लिम भाइयों ने तोड़ी तीन मजार, गिरफ्तार

बिजनौर। उत्तरप्रदेश के बिजनौर में रविवार की शाम शहर की तीन मजारों में तोडफ़ोड़ कर माहौल बिगाडऩे की कोशिश की गई। कुछ चादरों को जला दिया गया। मजारों में तोडफ़ोड़ करने वाले दो सगे भाई निकले हैं, जो मुस्लिम हैं। वे भगवा कपड़े पहनकर तोडफ़ोड़ करने पहुंचे थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि आरोपियों से पुलिस और इंटेलिजेंस पूछताछ कर रही है। यह पूरा मामला कांवड़ यात्रा के बीच माहौल को खराब करने की कोशिश है। अराजक तत्वों के द्वारा एक साजिश के तहत जानबूझकर कर प्रदेश का माहौल और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश की जा रही है। यूपी पुलिस अब अधिक सतर्कता बरत रही है।

बिजनौर के शेरकोट थाना क्षेत्र में दरगाह भूरे शाह बाबा, जलालशाह बाबा और कुतुबशाह बाबा की मजार है। रविवार की शाम पुलिस को सूचना मिली कि भगवा कपड़े पहने दो युवक मजारों में तोडफ़ोड़ कर रहे हैं। लोगों ने उनको पकडऩे का प्रयास किया तो उनमें से एक फरार हो गया। दूसरे युवक को दबोच लिया गया। आरोप है कि दोनों युवकों ने मजारों को सरिया और हथौड़े से तोडऩे के बाद वहां चढ़ाई गई चादरों में भी आग लगाई है। धार्मिक ग्रंथ को भी नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन जांच में यह दावा गलत निकला।

पुलिस को जैसे ही सूचना मिली आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने वक्त की नजाकत को समझते हुए तीनों मजारों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। साथ ही देर शाम एक युवक को गिरफ्तार कर लिया। दूसरे युवक की तलाश में तीन टीमें लगा दी गई, जिसे सोमवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी कमाल और आदिल सगे भाई हैं। दोनों ही राजमिस्त्री का काम करते हैं। दोनों ही धार्मिक हैं। जांच में सामने आया है कि यह दोनों देवबंदी फिरके के हैं, जोकि मजारों में विश्वास नहीं रखते हैं। इसी वजह से इन दोनों ने मजारों में तोडफ़ोड़ की है। हालांकि, दोनों ने तोडफ़ोड़ के समय भगवा पहन रखा था, जिससे मामले को दूसरा रंग दिया जा सके। फिलहाल दोनों से पूछताछ की जा रही है।

आरोपियों के पिता उस्मान भी मजदूरी का काम करते हैं। कमाल और आदिल के अलावा उनका एक बेटा और है। जिसकी मौत हो चुकी है। कमाल सबसे बड़ा है। उसकी शादी हो चुकी है। उसके चार बच्चे भी हैं।
आरोपियों की बहन आयशा ने बताया, ‘मेरे तीन भाई हैं। एक की मौत हो चुकी है। इसकी वजह से बड़े भाई कमाल डिप्रेशन में चले गए हैं। उनकी दवाएं वगैरह भी चलीं। थोड़ा ठीक हुए तो कुछ दिन पहले उन्हें कुवैत भेज दिया गया। उनकी दिमागी हालत देख कर उन्हें वहां से रिटर्न कर दिया गया। अब वह जब कल गए तो उन्होंने पहले जब मजार तोड़ी तो मेरा छोटा भाई वहां नहीं था। वह बाद में गया। अगर उनका दिमाग सही होता तो वह मजार क्यों तोड़ते? आखिर वह भी तो मुसलमान हैं। वह सिर्फ डिप्रेशन में हैं। इस वजह से उन्होंने तोड़ा।

भगवा कपड़े क्यों पहने के सवाल पर आयशा ने कहा, वह पहले भगवा कपड़े लेकर आए थे। उन्हें हम लोगों ने समझाया कि कोई हिंदू मस्लिम नहीं होता यह गलत है, लेकिन वह नहीं माने। हम लोगों को अंदाजा नहीं था कि वह ऐसा कोई कदम उठायेंगे। उन्होंने घर पर भी एक थैला जला दिया है। जिसमें भाई के जरूरी कागजात थे। मेरे भाई की वजह से मेरे पिता को डिप्रेशन भी है। मेरा छोटा भाई भी डिप्रेस रहता है। सुबह वर्दी में कुछ लोग आए। घर में मेरी अम्मी और भाभी थी। उन्हें बिना पूछे पूरा घर का सामान उलट पलट दिया। उनमें से कुछ लोग वर्दी में थे तो कुछ लोग सादे कपड़े पहने थे।