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मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर  19 को राहुल से करेंगे चर्चा कैप्टन

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर 19 को राहुल से करेंगे चर्चा कैप्टन

 सिद्धू मामले पर बोले त्यागपत्र का सवाल ही नहीं

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री   कैप्टन अमरेन्द्र सिंह 19 अप्रैल को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में ही नए कैबिनेट मंत्रियों के नाम फाइनल हो जाएंगे। राहुल की स्वीकृति के तुरंत बाद ही मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह भी रखा जा सकता है। राहुल के साथ मुख्यमंत्री की होने वाली बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़, प्रदेश प्रभारी आशा कुमारी और सह प्रभारी हरीश चौधरी भी रहेंगे।

राहुल कैबिनेट विस्तार पर अपनी मुहर लगाने से पहले सभी नेताओं से विचार-विमर्श करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री की कैबिनेट में अभी 9 मंत्रियों की कमी है, लेकिन कैप्टन दो चरणों में कैबिनेट विस्तार चाहते हैं। पहले चरण में छह मंत्रियों को बनाए जाने की संभावना है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू के त्याग पत्र पर स्पष्ट कहा है कि उनका त्याग पत्र लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

मुख्यमंत्री ने त्याग पत्र के केसों पर विराम लगाते हुए कहा कि सड़क पर झगड़े से संबंधित केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2007 में नवजोत सिंह सिद्धू की सज़ा पर रोक लगा दी थी और हाई कोर्ट के सज़ा वाले आदेशों को चुनौती के खि़लाफ़ श्री सिद्धू की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने अभी फ़ैसला सुनाना है। उन्होंने कहा कि इस 30 वर्ष पुराने केस में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में केवल अपना पक्ष दोहराए जाने के आधार पर इस मंत्री से इस्तीफ़ा मांगने का सवाल ही पैदा नही होता। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘सज़ा पर रोक के कारण श्री सिद्धू को मंत्रालय में शामिल करने के समय न तो कोई रुकावट थी और न ही अब उनके मंत्री बने रहने में कोई अड़चन है।

सिद्धू से इस्तीफ़ा मांगे जाने संबंधित रिपोर्टों और विरोधी पक्ष द्वारा कैबिनेट मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाए जाने के दौरान मुख्यमंत्री का यह स्पष्टीकरण आया है। श्री सिद्धू के खि़लाफ़ इस केस में उनकी सरकार की तरफ से अपना पक्ष न बदले जा सकने वाली बात को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने फिर उम्मीद ज़ाहिर की कि इस केस का फ़ैसला करते समय जज द्वारा श्री सिद्धू के समाज और देश प्रति योगदान को ध्यान में रखा जायेगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मामले के मौजूदा घटनाक्रम को दुखद करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवल कानूनी तौर पर व्यावहारिक पक्ष ही लिया है।

सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस मंत्री का जानबूझ कर समर्थन न किये जाने संबंधी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक सरकारी वकील को इस केस से जुड़ी कोई नयी जानकारी नही मिलती, तब तक उसके लिए नया पैंतरा लेना कानूनी तौर पर संभव नहीं है। राज्य सरकार के वकीलों ने निचली अदालत और हाई कोर्ट में ख़ास नुकते-नजऱ से पक्ष रखा था और किसी नये सबूत की अनुपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के सामने पक्ष बदलने का कोई रास्ता नहीं था। मुकम्मल तौर पर कानूनी पक्ष को ध्यान में रखते मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी वकील को तथ्यों के साथ बंधे रहना और इसकी रक्षा करने का फजऱ् है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास निचली अदालत और हाई कोर्ट में  यू-टर्न लेना कोई विकल्प नहीं था।

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