लखनऊ: योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा से यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी छलांग

लखनऊ: योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा से यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी छलांग

Lucknow

Yogi Adityanath's Japan visit gives a big leap to green hydrogen in UP

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा उत्तर प्रदेश को वैश्विक हरित ऊर्जा मानचित्र पर स्थापित करने में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। जापान के यामानाशी प्रांत के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता (MoU) प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीकी साझेदारी और अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। योगी सरकार ने इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बजट 2026-27 में अतिरिक्त ऊर्जा विकास के लिए ₹2,104 करोड़ का भारी-भरकम प्रस्ताव रखा है, जो यूपी को स्वच्छ ऊर्जा का नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

तकनीकी साझेदारी और 'पावर टू गैस' मॉडल

यामानाशी प्रांत ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक में दुनिया का अग्रणी क्षेत्र है, जहाँ की 'पावर टू गैस' प्रणाली सौर और पवन ऊर्जा को इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन में बदलती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सुविधा केंद्र का दौरा कर इसके भंडारण और स्वच्छ परिवहन में उपयोग का बारीकी से अवलोकन किया है। समझौते के तहत, यूपी के उच्च तकनीकी संस्थानों के छात्र जापान में हाइड्रोजन उत्पादन और सुरक्षा मानकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेंगे, ताकि वे लौटकर प्रदेश की इंडस्ट्री और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इस उन्नत तकनीक को लागू कर सकें।

अनुसंधान और संसाधनों का समन्वय

स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए IIT कानपुर में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' विकसित किया जा रहा है, जो अनुसंधान और उद्योग के बीच एक सेतु का काम करेगा। यहाँ हाइड्रोजन उत्पादन की लागत कम करने और सुरक्षित भंडारण प्रणालियों पर शोध होगा। उत्तर प्रदेश के प्रचुर जल संसाधन और तेजी से बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता इस पहल के लिए बेहद अनुकूल हैं। सरकार की रणनीति अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को सीधे हाइड्रोजन उत्पादन से जोड़ने की है, जिससे औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित हो सकें।

गोरखपुर से हुई ठोस शुरुआत: परिणाम दिखने लगे

उत्तर प्रदेश केवल भविष्य की योजनाएं ही नहीं बना रहा, बल्कि धरातल पर भी ठोस परिणाम दे रहा है। गोरखपुर के खानीपुर गांव में मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है, जो देश के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर की सबसे बड़ी पहल है। यहाँ ग्रीन हाइड्रोजन को सीएनजी और पीएनजी में मिलाकर घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए भेजा जा रहा है, जिससे हर साल लगभग 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यह त्रिस्तरीय रणनीति—प्रशिक्षण, अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग—उत्तर प्रदेश को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए तैयार कर रही है।