उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण: योजनाओं से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण: योजनाओं से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

Women Empowerment in Uttar Pradesh

Women Empowerment in Uttar Pradesh

शिखा सिंह। Women Empowerment in Uttar Pradesh: महिला सशक्तीकरण का नया अध्याय पढ़ना हो तो अब उत्तर प्रदेश के पन्नों को खोला जाना चाहिए। प्रदेश की हर योजना एक ऐसा पन्ना है जिसमें सफलता की नई कहानियां लगभग रोज ही लिखी जा रहीं हैं। यह इस बात के उदाहरण हैं कि एक महिला जब आर्थिक रूप से सशक्त होती है तो उसका प्रभाव सिर्फ उसे आत्मनिर्भर ही नहीं बनाता, बल्कि वह पूरे परिवार के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की शक्ति बन जाती है।

वह समाज और राष्ट्र की समृद्धि का आधार भी बन जाती है। घर की व्यवस्था से लेकर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की योजना तक, एक आत्मनिर्भर महिला अपने परिवार के हर पहलू को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगती है। इसी सोच से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सशक्तीकरण को विकास के केंद्र में रखा और आज जाने कितनी महिलाएं लखपति दीदी में परिवर्तित होकर नारी स्वाभिमान का प्रतीक बन गई हैं।

भारतीय समाज में लंबे समय तक ग्रामीण महिलाओं की भूमिका परिवार की सीमाओं में ही परिभाषित की जाती रही। खेत-खलिहान में उनके श्रम का योगदान भले ही महत्वपूर्ण रहा हो, लेकिन आर्थिक पहचान और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सीमित रही। गांवों में आमतौर यह धारणा प्रचलित थी कि महिलाएं घर की जिम्मेदारियों तक ही सीमित रहेंगी और आर्थिक गतिविधियों का नेतृत्व पुरुष ही करेंगे।

लेकिन, आज उत्तर प्रदेश के गांवों में यह धारणा तेजी से बदल रही है। आज इस राज्य में महिलाएं बीसी सखी, विद्युत सखी, कृषि आजीविका सखी, सूर्य सखी, लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं से विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ी दिखाई दे रहीं हैं। ग्रामीण समाज की सोच और संरचना में आए व्यापक बदलाव का यह एक बड़ा प्रतीक है जो भावी पीढ़ी के भविष्य की आधारशिला भी रख रहा है।

यह प्रश्न सहज ही खड़ा हो सकता है कि आखिर उत्तर प्रदेश में यह बदलाव आया कैसे? तो इसका जवाब स्वयं सहायता समूहों के व्यापक नेटवर्क में मिलता है जो महिलाओं की इस नई यात्रा का आधार है। छोटी-छोटी बचत, सहजता से ऋण का उपलब्ध होना और छोटे-छोटे उद्यम ने कभी घूंघट में रहने वाली महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार किया है। बात को बीसी सखियों की सफलता से आगे बढ़ाते हैं।

एक समय था जबकि गांवों में बैंकिंग सेवा की उपलब्धता सीमित थी और जहां थी भी, वहां ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी। योगी सरकार ने इस चुनौती को अवसर में बदला और महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें बैंक कॉरेस्पांडेंट बनाया। यह महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करके उनमें आत्मविश्वास भरने की बड़ा अभियान था। वे डिजिटल दुनिया का हिस्सा बनीं और लोगों को बैंकिंग सेवाएं देकर उनके कमीशन से आर्थिक समृद्धि का वाहक बनीं। कानपुर देहात की रश्मि सिंह इसका प्रेरक उदाहरण हैं।

पहले वे सामान्य ग्रामीण जीवन जी रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बीसी सखी का प्रशिक्षण लिया। आज वे अपने क्षेत्र में सैकड़ों लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहीं हैं। आज प्रदेश में लगभग 40 हजार बीसी सखियां हैं जिन्होंने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग लेन-देन गांवों तक पहुंचाया है। यह आंकड़ा इस बात का गवाह है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं वित्तीय व्यवस्था की मजबूत कड़ी बन सकती हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए कोई एक ही राह नहीं खोली, जाने कितनी योजनाएं उनका संबल बनी हुई हैं। विद्युत सखी के रूप में जिलों में महिलाएं बिजली बिल का संग्रह कर उपभोक्ताओं को जरूरी जानकारियां दे रहीं हैं। कृषि आजीविका सखी तो खेतों में नई चेतना का प्रतीक हैं। इस रूप में वे नवाचार की वाहक बनी हुईं हैं। प्रशिक्षित होकर वे प्राकृतिक खेती, पोषण वाटिका, पशु पालन, जैविक खेती आदि के बारे में किसानों को जानकारियां बांट रही हैं। सूर्य सखी के रूप में प्रशिक्षण लेकर उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं तलाशी हैं।

इसके साथ यह भी साबित किया है कि तकनीकी क्षेत्र में वह पुरुषों की बराबरी करने में सक्षम हैं। 57 हजार से अधिक सूर्य सखियां प्रदेश की ग्राम पंचायतों में नई रोशनी होंगी। ड्रोन दीदियों ने तो आत्मविश्वास की वह उड़ान भरी है, जो बेमिसाल है और उनकी नई पहचान है। बिजनौर की सुनीता अपने गांव और आसपास ड्रोन दीदी के रूप में विख्यात हैं। महिला सामर्थ्य योजना के तहत मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों का गठन उनकी नई सामर्थ्य है।

उत्तर प्रदेश में यह सिर्फ योजनाएं भर नहीं हैं। महिलाओं को एक लक्ष्य भी मिला है कि इनके सहारे वह लखपति दीदी की श्रेणी में आएं। सरकार उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन और बाजार से जुड़ने के प्रशिक्षण के साथ उनके साथ खड़ी है। लखपति दीदी अभियान राज्य सरकार का एक सशक्त संदेश है कि महिलाओं की आर्थिक क्षमता असीमित हो सकती है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर दिया जाए। समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण भी बदला है। परिवार में सम्मान हासिल हुआ है। यह परिवर्तन सामाजिक चेतना ओर जागरण का प्रतीक है। यह एक नए उत्तर प्रदेश की झलक देती है जिसमें महिलाएं विकास की दिशा तय कर रहीं हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। योगी सरकार ने उनकी आत्मनिर्भरता का रास्ता तय कर दिया है।

(शिखा सिंह फूड टेक्नोलॉजिस्ट और एंटरप्रेन्योर हैं।)